18 जुलाई 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

किताब या कुर्सी? छत्तीसगढ़ के MCB में 27 शिक्षक अब पढ़ाएंगे भी और संभालेंगे भी हॉस्टल!

Teacher Hostel Incharge: एमसीबी जिले में 27 शिक्षकों को स्कूल में पढ़ाने के साथ आदिवासी छात्रावासों और आश्रमों का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने से शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
2 min read
Google source verification
Teachers Double Duty

Teachers Double Duty: स्कूल में पढ़ाएं या हॉस्टल संभालें?(photo-AI)

Teachers Double Duty: छत्तीसगढ़ के एमसीबी जिले में एक तरफ राज्य सरकार स्कूलों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति और बेहतर शैक्षणिक गुणवत्ता पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर एमसीबी जिले में 27 शिक्षकों को स्कूल के साथ-साथ आदिवासी छात्रावासों और आश्रमों का अतिरिक्त प्रभार सौंपे जाने का मामला चर्चा में है। इस फैसले ने शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर नई बहस छेड़ दी है।

MCB Teachers Double Duty: क्या पढ़ाई से ज्यादा जरूरी हो गया प्रशासनिक काम?

एमसीबी जिला पहले ही बोर्ड परीक्षाओं के कमजोर परिणामों को लेकर सवालों के घेरे में रहा है। ऐसे में शिक्षकों को अतिरिक्त प्रशासनिक जिम्मेदारियां देने का निर्णय कई सवाल खड़े करता है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षक का प्राथमिक दायित्व कक्षा में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है, लेकिन अब उन्हें छात्रावासों की निगरानी, भोजन व्यवस्था, बच्चों की सुरक्षा और अन्य प्रशासनिक कार्य भी देखने होंगे।

15-20 किलोमीटर दूर हॉस्टल, कैसे निभेगी दोहरी जिम्मेदारी?

जानकारी के अनुसार, कई शिक्षकों को ऐसे छात्रावासों का प्रभार दिया गया है, जो उनके स्कूलों से 15 से 20 किलोमीटर दूर स्थित हैं। दूसरी ओर, शिक्षकों की उपस्थिति विद्या समीक्षा केंद्र (VSK) ऐप के जरिए दर्ज की जाती है, जिससे दोनों स्थानों पर समय देना एक बड़ी चुनौती बन सकता है। शिक्षकों के सामने अब सवाल है-वे पहले कक्षा में पढ़ाएं या छात्रावास में व्यवस्थाएं संभालें?

सरकार के निर्देश और जिला प्रशासन के फैसले में विरोधाभास

राज्य सरकार लगातार शिक्षकों के संलग्नीकरण को समाप्त करने और उन्हें मूल पदस्थापना वाले स्कूलों में कार्य करने के निर्देश दे रही है। इसके बावजूद छात्रावास अधीक्षकों की कमी का हवाला देकर शिक्षकों को अतिरिक्त जिम्मेदारी देना प्रशासनिक विरोधाभास के रूप में देखा जा रहा है।

दिलचस्प बात यह है कि जहां कलेक्टर ने इसे अस्थायी व्यवस्था बताया है, वहीं जिला शिक्षा अधिकारी ने इस संबंध में जानकारी नहीं होने की बात कही है। अधिकारियों के अलग-अलग बयान प्रशासनिक समन्वय पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं।

शिक्षा व्यवस्था पर क्या होगा असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शिक्षकों पर लगातार अतिरिक्त जिम्मेदारियां डाली जाती रहीं, तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई और परीक्षा परिणामों पर पड़ सकता है। खासकर ऐसे समय में, जब एमसीबी जिले को शैक्षणिक प्रदर्शन में सुधार की सख्त जरूरत है। अब नजर इस बात पर है कि शासन इस व्यवस्था की समीक्षा करता है या फिर शिक्षकों को लंबे समय तक दोहरी जिम्मेदारी निभानी पड़ेगी।