
हाबूलाल शर्मा कोटा. आमजन के काम कराने के लिए भले ही नगर निगम बजट की कमी का बहाना गिनाने से नहीं थकता हो, लेकिन यदि मामला विधायक के गांव का है तो तय राशि से चार गुना अधिक राशि खर्चने से भी निगम पीछे नहीं हटता। मामला है निगम क्षेत्र के बंधा धर्मपुरा गांव में सड़क पर रपट बनाने का है। हैरानी की बात यह है कि निगम ने यह रपट बनाने के लिए आठ लाख की अनुमानित लागत मानकर टेण्डर जारी किए थे, लेकिन बाद में यह राशि लगातार बढ़ती गई। टेण्डर रिवाइज कर इस रपट पर 35 लाख खर्च कर दिए। इस वार्ड से कोटा उत्तर विधायक के रिश्तेदार ओम गुंजल पार्षद हैं। मजेदार बात यह कि इसकी जानकारी न महापौर को है, न ही आयुक्त को।
स्मृति वन का नाम अब अटल स्मृति वन… छह चौराहों का भी नामाकरण किया
सूत्रों ने बताया कि वार्ड पांच में बंधा धर्मपुरा मार्ग पर रपट बनाने के लिए निगम ने 12 अगस्त 2013 को निविदाएं आमंत्रित की थीं। एक फर्म को 22 जनवरी 2014 कार्यादेश जारी कर दिया। निर्माण कार्य लगभग पूरा होने से पहले ही 1 दिसम्बर 2014 को रामगंजमंडी विधायक चंद्रकांता मेघवाल ने निर्माण कार्य रोकने और पीर बाबा की मजार के पास प्रस्तावित छोटी पुलिया को बड़ा करने के लिए निगम अफसरों को पत्र लिखा। पत्र में बड़े पाइप लगाने और पुलिया की ऊंचाई बढ़ाने की मांग की गई थी।
ऐसे चला खेल
निर्माण कार्य तकरीबन पूरा होने की स्थिति में निगम प्रशासन ने विधायक के पत्र पर कोई निर्णय नहीं किया। 12 मई 2015 को पार्षद ओम गुंजल ने न सिर्फ रपट निर्माण कार्य के टेंडर को रिवाइज करने के लिए महापौर महेश विजय को पत्र लिखा, बल्कि खुद ही 35,27,600 रुपए का खर्च बताते हुए तकमीना भी बनाकर भेज दिया। महापौर ने रपट का टेंडर रिवीजन करने के बजाय तत्कालीन एक्सईएन को पुलिया का निर्माण कार्य बरसात से पहले कराने के निर्देश जारी किए गए। 22 मई 2015 को एईएन और एक्सईएन की अभिशंसा अनुसार पार्षद द्वारा बताई गई टेंडर की रिवाइज राशि की तकनीकी अनुमति भी जारी कर दी गई।
कोटा में Crime out of Control : बदमाशों ने दिनदहाड़े पेट्रोल-पंप कर्मियों पर तानी पिस्तौल
400 प्रतिशत बढ़ गई लागत
अफसरों ने निगम की किसी भी कमेटी की मंजूरी और वित्तीय एवं तकनीकी स्वीकृति लिए बगैर ही डेढ़ साल पहले जारी हुए आठ लाख के टेंडर की लागत राशि को तमाम कायदे कानूनों को ताक पर रख 400 प्रतिशत तक बढ़ा दिया। टेंडर राशि बढ़ाने की स्वीकृति मांगने के तीन दिन बाद ही संशोधित कार्यादेश जारी करने के निर्देश दे दिए गए। सहायक अभियंता ने
काम को संतोषजनक बता 21 सितम्बर 2015 को 34.61 लाख रुपए के भुगतान की मंजूरी भी दे दी। हालांकि तत्कालीन अधिशासी अभियंता अवधेश दुबे ने भुगतान के लिए प्रस्तुत किए गए बिलों पर दस्तखत नहीं किए, फिर भी निगम अफसरों ने ठेकेदार को भुगतान कर दिया।
ये है नियम
किसी भी टेंडर की राशि का अधिकतम दस प्रतिशत ही
रिवाइज कर सकते हैं। इससे ज्यादा खर्च प्रस्तावित होने पर डीएलबी को प्रस्ताव भेजकर अनुमति लेनी होती है, लेकिन उन्हें भी अधिकतम 50 प्रतिशत लागत बढ़ाने का अधिकार है। बंधा धर्मपुरा की रपट के टेंडर को निगम अफसरों ने 400 प्रतिशत रिवाइज कर दिया, जिसका कहीं कोई
नियम ही नहीं है।
मैंने तो टेंडर रिवाइज का पत्र लिखा था
& इस रपट के टेण्डर मेरे पार्षद बनने से पहले जारी हो गए थे। मैंने तो टेण्डर रिवाइज करने के लिए पत्र लिखा था। कितनी राशि खर्च की गई मुझे जानकारी नहीं है।
ओम गुंजल पार्षद
मेरे से पहले का मामला
आठ लाख की रपट बनाने के टेण्डर रिवाइज कर 35 लाख रुपए खर्च करने का मामला मेरे सामने नहीं आया है। मेरे आने से पहले का मामला है।
जुगलकिशोर मीणा, आयुक्त
बंधा धर्मपुरा में रपट निर्माण के रिवाइज के लिए पार्षद गुंजल का पत्र आया था। मैंने उसमें एक्सईएन को बरसात से पूर्व पुलिया निर्माण के लिए लिखा था। 8 लाख की जगह 35 लाख का काम करवा दिया, इसकी मुझे जानकारी नहीं है। वैसे भी दस प्रतिशत ही रिवाइज कर सकते हैं।
महेश विजय, महापौर