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परमवीर चक्र विजेता कैप्टन योगेन्द्र सिंह ने कोचिंग विद्या​र्थियो को बताया योद्धा और सक्सेज होने का फार्मूला

कोटा. आप भी मेरी तरह ही योद्धा हैं। मैं मां भारती की रक्षा के लिए योद्धा बना। आपको अपने सपनों को साकार करने के लिए योद्धा बनना है। एक योद्धा कभी नहीं हारता। कुछ इसी तरह से कोचिंग छात्रों को धैर्य, साहस और आगे बढ़ने का मंत्र दिया परमवीर चक्र विजेता सूबेदार मैजर कैप्टन योगेन्द सिंह यादव ने। एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के जवाहर नगर स्थित समुन्नत कैम्पस में मोटिवेशनल यौद्धा सेशन में कैप्टन यादव ने कोचिंग विद्यार्थियों को लाइफ साइंस में ट्रिपल पी को सक्सेज का फार्मूला बताया।

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कोटा

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Hemant Sharma

Sep 22, 2023

कोटा. आप भी मेरी तरह ही योद्धा हैं। मैं मां भारती की रक्षा के लिए योद्धा बना। आपको अपने सपनों को साकार करने के लिए योद्धा बनना है। एक योद्धा कभी नहीं हारता। कुछ इसी तरह से कोचिंग छात्रों को धैर्य, साहस और आगे बढ़ने का मंत्र दिया परमवीर चक्र विजेता सूबेदार मैजर कैप्टन योगेन्द सिंह यादव ने।एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के जवाहर नगर स्थित समुन्नत कैम्पस में मोटिवेशनल यौद्धा सेशन में कैप्टन यादव ने कोचिंग विद्यार्थियों को लाइफ साइंस में ट्रिपल पी को सक्सेज का फार्मूला बताया।

कैप्टन यादव ने बच्चों से कहा कि लाइफ में तीन ‘पी होना जरूरी है। पहला परपज… यानी उद्देश्य। दूसरा पैशन….यानी धैर्य। जीवन चुनौतियां भरा होता है। कई बाधाएं आती हैं, लेकिन उद्देश्य से भटकना नहीं है। तीसरा ‘परफोर्मेंस’ है। लगन, ईमानदारी व एकाग्रता के साथ आगे बढ़ेंगे तो परफोर्मेंस अपने आप बेहतर होती चली जाएगी। फिर आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। करगिल युद्ध के खुद से जुड़े संस्मरण बताते हुए कैप्टन यादव ने विद्यार्थियों को जोश से भर दिया। सीनियर वाइस प्रेसिडेंट सीआर चौधरी, वाइस प्रेसिडेंट विजय सोनी ने यादव का स्वागत किया।

19 की आयु में मिला परमवीर चक्र

कैप्टन योगेन्द्र यादव को कारगिल युद्ध में टाइगर हिल के लिए हुई जंग के लिए परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था। देश में अब तक 21 योद्धाओं को यह सम्मान मिला है, उनमें सबसे कम उम्र मात्र 19 वर्ष की उम्र में यादव को यह सम्मान मिला। कैप्टन यादव ने मिशन को पूरा करने में 15 गोलियां व हैंड ग्रेनेड के हमले सहे। इसके बावजूद यादव ने यूनिट के साथ टाइगर हिल पर तिरंगा फहराकर फतह हासिल की थी।

हम हर परििस्थति में स्ट्रॉंग

परमवीर चक्र विजेता कैप्टन योगेन्द्र यादव ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि कोटा कॅरियर का केन्द्र है। यहां युवा अपना भविष्य बनाने आते हैं। कई बार बच्चे लक्ष्य को बोझ समझ लेते हैं। ऐसे में मार्गदर्शन की जरूरत होती है। परिवर्तन को हम एकदम स्वीकार नहीं कर सकते, लेकिन हमें इसे सकारात्मक रूप में लेना चाहिए। यादव ने कहा कि हमारी सेना शुरू से ही स्ट्रॉन्ग रही है। 1948 से अब तक जो भी अवसर आए सेना ने नया इतिहास लिखा है। पहले और अबकी हम तुलना नहीं कर सकते। अब काफी कुछ बदला है। तकनीकी में बदलाव का फर्क हर क्षेत्र में पड़ता है। अब लड़ने के तरीके बदले हैं तो सोच व हथियारों में बदलाव आया है। अग्निवीर की भर्ती भी बदलाव को ही दर्शाती है।