
अभिषेक गुप्ता
प्रदेश में पहले भीषण गर्मी और अब भयंकर उमस सता रही है। इस बार तापमान के बाद अब नमी रेेकॉर्ड स्तर पर है। उमस वाली गर्मी के चलते डी-हाईड्रेशन के मरीज बढ़ रहे हैं। इनमें से कई एक्यूट किडनी फेल्योर के शिकार हो रहे हैं। कई भर्ती मरीजों को डायलिसिस की नौबत आ रही है। इस मौसम में अस्पतालों में 300 से 350 रहने वाली मेडिसिन की ओपीडी 500 से 600 तक पहुंच गई है। इनमें से प्रतिदिन करीब 10 से 15 मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है। भर्ती रोगियों में से रोजाना दो को डायलिसिस की जरूरत पड़ रही है। ज्यादातर मरीज उल्टी, दस्त, पेट दर्द, बुखार के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। सरकारी अस्पतालों के मेडिसिन वार्ड फुल हो गए हैं। क्षमता से अधिक मरीज आने से उन्हें बैंच लगाकर भर्ती करना पड़ रहा है।
एक्यूट किडनी फेल्योर के केस बढ़े
इस मौसम में रेकॉर्ड नमी के कारण खाना जल्दी खराब हो जाता है। मिक्खयों की बहुतायत से खाना दूषित हो रहा है। स्वच्छता को दरकिनार कर बाहर के खाने के कारण कई लोग बीमार भी हो रहे हैं। दूषित भोजन के सेवन से आंतें संक्रमित हो जाती है। मरीज उल्टी-दस्त, पेट दर्द, बुखार से पीड़ित हो जाता है। शरीर में पानी की कमी हो जाती है। जिसका असर किडनी पर पड़ रहा है। ऐसे में मरीज एक्यूट किडनी फेल्योर में चला जाता है। डायलिसिस की जरूरत भी पड़ रही है। हालांकि यह किडनी फेल्योर स्थाई नहीं है। उपचार के बाद मरीज स्वस्थ हो जाता है। लेकिन समय पर उपचार नहीं लेने पर यह जानलेवा भी हो सकता है।
ये लक्षण तो देर नहीं करें…
उल्टी जैसा मन रहना, पतले दस्त, मरोड लगकर पेट दर्द, बदन दर्द, पेशाब का कम आना, पेशाब में जलन आदि।
सावधानी से ही बचाव संभव
बाहर का खाना खाने से बचें।
बासी खाना ना खाए।
घर पर भी पके हुए भोजन को ढककर रखें, ताकि मिक्खयों से संक्रमित ना हो।
थोड़े-थोड़ अंतराल पर पानी पीते रहे।
इस बार मौसम ने ढहाया सितम
50.5 डिग्री रहा चुरू में 29 मई को सर्वाधिक तापमान
48 डिग्री रहा कोटा में सर्वाधिक तापमान 27 मई को
95% सर्वाधिक आर्द्रता 27 जुलाई को कोटा में दर्ज
पानी की कमी से किडनी पर पड़ रहा दुष्प्रभाव
टॉपिक एक्सपर्ट
इस बार गर्मी और उमस दोनों चरम पर है। ऐसे मौसम में शरीर में पानी की कमी हो जाती है। भोजन भी जल्दी दूषित हो जाता है। उल्टी, दस्त, पेट दर्द और बुखार की शिकायत बढ़ गई हैं। समय पर इलाज नहीं लेने पर उल्टी-दस्त के कारण शरीर में पानी की कमी से किडनी पर असर पड़ रहा है। पेशाब बनना रुक जाता है। किडनी फेल्योर के रोगी बढ़ गए हैं। दिमाग पर भी असर पड़ रहा है। मरीज बेहोश भी हो जाता है। दवा से उपचार हो रहा है, लेकिन कइयों को डायलिसिस की जरूरत भी पड़ रही है।
डॉ. पंकज जैन, एसोसिएट प्रोफेसर, मेडिकल कॉलेज कोटा