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बेहद प्यार करता था वो, पलभर भी एक दूसरे से नहीं होते थे दूर.. महक रह गई अकेली, नाहर को ढूंढ़ती है निगाहें….

kota news: अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में बाघ की मौत के बाद बा​घिन अकेली रह गई। वह साथी के चले जाने से बेहद उदास है। उसकी निगाहें नाहर को तलाश रही है।वह क्या जाने ​ कि अब नाहर लौटकर आने वाला नहीं है।

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कोटा

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Hemant Sharma

Aug 10, 2024

कोटा. अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क में नाहर के जाने के बाद महक अकेली रह गई। दोनों की जोड़ी खूब जमती थी। अब जोड़ी टूट गई और महक का आंगन सूना हो गया। इंसानों की तरह भले ही बोल नहीं पाते, लेकिन वन्यजीव काफी संवेदनशील होते हैं। इसका उदाहरण नाहर की मौत के बाद देखने को मिला। महक जोड़ीदार को तलाशती रही।

कर्मचारियों के अनुसार वह ज्यादातर समय कैज में यहां से वहां चक्कर लगाती रही। उसने खाना भी नहीं खाया। महक व नाहर लंबे समय से साथ थे। जयपुर से कोटा लाने के पहले भी नाहरगढ़ पार्क में दोनों साथ थे, महक यहां आई तो नाहर को भी लाया गया। दोनों को 1 मार्च 2023 में पार्क में शिफ्ट किया गया था।

पर्यटकों को आकर्षित करती थी जोड़ी

विभाग के मनोज शर्मा बताते हैं कि महक के साथ नाहर की जोड़ी पर्यटकों को आकर्षित करती थी। दोनों के बीच अच्छा तालमेल था। ऐसे अवसर कम ही आते थे, जब कोई किसी एक को कैमरे में कैद कर सके। प्रभारी बुधराम जाट बताते हैं कि जब से बाघ-बाघिन की जोड़ी कोटा आई, तब से दर्शकों की संख्या में भी वृद्धि हो गई।

महक से छोटा था नाहर

बाघिन महक नाहर से 2 साल बड़ी है। नाहर का जन्म 20 अक्टूबर 2006 को हुआ था। वह करीब 17 वर्ष 10 माह का था। वहीं बाघिन महक 28 अगस्त 2004 को जन्मी थी। महक को मार्च 2019 में कोटा चिड़ियाघर से जयपुर भेजा गया था, वहीं नाहर वर्ष 2013 में वन विहार भोपाल से जयपुर लाया गया था।

पहले मछंदर का साथ छूटा, अब नाहर का

बाघिन महक वर्ष 2011 से 2019 तक कोटा के नयापुरा स्थित रियासतकालीन चिड़ियाघर में रही थी। इस दौरान इसकी यहां बाघ मछंदर के साथ जोड़ी थी, लेकिन मछंदर की 16 अप्रेल 2016 में मौत हो गई। बाघिन अकेली रह गई। लंबे समय तक बाघिन अकेली रही फिर उसे जयपुर भेज दिया। जयपुर में भी महक, नाहर के साथ रही, लेकिन शावक नहीं जन्मे।

जैसा कि इन्होंने बताया

वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी एवं विषय के विशेषज्ञ डॉ अखिलेश पांण्डेय बताते हैं कि बाघ की मौत आयु की दृष्टि से सामान्य है। पर्यटकों को निश्चित रूप से बाघ की कमी खलेगी। जल्द ही बाघिन की जोड़ी बने व कम आयु वाले बाघ-बाघिन भी लाए जाएं। पूर्व की हिस्ट्री के अनुसार कोटा के चिड़ियाघर में शेर व बाघ के शावक जन्मे हैं।

वन विभाग की वन्यजीव शाखा के उपवन संरक्षक अनुराग भटनागर ने बताया कि बाघ की मौत सामान्य है। आमतौर पर आयु 15 से 16 साल होती है। बाघ 17 वर्ष से अधिक आयु का था। फिर भी विसरा लिया है, जिन्हें जांच के लिए बरेली भेजा जाएगा। बाघ में पार्क की कमी पूर्ति के लिए उच्च अधिकारियों को अवगत करवाएंगे।