कोटा. राष्ट्रीय मेला दशहरा के अन्तर्गत शनिवार को किसान रंगमंच राजस्थानी लोकनृत्य व सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इस दौरान विभिन्न कलाकारों ने एक से बढ़ कर एक लोकनृत्य की प्रस्तुति देकर राजस्थानी संस्कृति को जीवंत किया। लोक कलाकारों ने कार्यक्रम का आगाज भगवान गणेश के स्तुति गीत आओजी गजानन पावणिया… से की। कलाकारों ने काल्यो कूद पड्यो मेला में, साइकिल पंचर कर लायो… लोकगीत पर कालबेलिया नृत्य से शुरूआत की गई। वहीं, डूंगर ऊपर डूंगरी… समेत अन्य गीतों पर अनथक अनवरत करीबन एक घंटे तक प्रस्तुतियां दी।
इसके बाद रेशमा रंगीली ने बाजुदार बंगड़ी… भंवरसा ल्याई द्यो… म्हारो लहरियो पंचरंगी गोटेदार… जैसे गीतों पर भवई नृत्य की रोमांचक प्रस्तुति दी गई। उन्होंने सिर पर दो कांच के गिलास पर मटका रखकर नाचते हुए कीलों और तलवार पर चलकर दिखाया तो हर किसी ने दांतों तले अंगुली दबा ली। उन्होंने धूमेरदार लहंगो…तारां री चूनरी…चिरमी रा ढाला चार… जैसे लोकगीतों पर चरी नृत्य की प्रस्तुति दी। उन्होंने स्वागत गीत केसरिया बालम आओ नी पधारो म्हारे देस…. पर अतिथि सत्कार की लोक परंपरा को साकार कर दिया। छोटू दादा ने कॉमेडी से लोटपोट कर दिया। इस दौरान अमित म्यूजिकल ग्रुप चेस्ट म्यूजिकल ग्रुप प्रियांशी म्यूजिकल ग्रुप पिंकी म्यूजिकल ग्रुप भारत आर्केस्ट्रा महावीर आर्केस्ट्रा की ओर से प्रस्तुति दी गई।