कोटा,बूंदी। छोटी काशी के नाम से विख्यात बूंदी जिले की हिण्डोली विधानसभा क्षेत्र का राजनीति में विचित्र संयोग है। यहां पिछले 28 साल से जिस पार्टी का विधायक निर्वाचित हुआ, उस दल की सरकार नहीं बनी है। विधायक को विपक्ष में ही बैठना पड़ा है।
शतक पार कर जाएगी रावण की बुराइयों की लम्बाई और आँखे देख चकरा जाएगी सब की आँखे …
1985 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा के गणेश बैरागी निर्वाचित हुए तो प्रदेश में सरकार कांग्रेस की बनी। 1990 में कांग्रेस की रमा पायलट को जनता ने विधायक चुना तो भाजपा की सरकार बनी। इसमें मुख्यमंत्री भैंरोसिंह शेखावत बने। 1993 में फि र से शेखावत की सरकार बनी तो हिण्डोली में विधायक कांग्रेस के शांति कुमार धारीवाल चुने गए।1998 में अशोक गहलोत की सरकार बनी तब कांग्रेस की ही विधायक रमा पायलट चुनी गई, लेकिन शायद यह होनी को मंजूर नहीं थी। पायलट ने ढाई वर्ष में ही सीट छोड़ दी। सीट खाली होने पर 2001 उपचुनाव हुए जिसमें भाजपा के नाथूलाल गुर्जर विधायक बन गए। इसके बाद वर्ष 2003 में वसुंधरा राजे की सरकार रही, जिसमें हरिमोहन शर्मा कांग्रेस से विधायक रहे। इसके बाद फि र 2008 में कांग्रेस की सरकार बनी और गहलोत सीएम बने तो विधायक भाजपा के प्रभू लाल सैनी चुने गए।
चुनावों में न हो कोई गड़बड़ इसलिए 10 दिन पहले ही ले लिया यह बड़ा फैसला ..
वर्ष 2013 में प्रदेश में भाजपा की सरकारी बनी तो हिण्डोली में विधायक कांग्रेस के अशोक चांदना चुने गए। ऐसे में बीते तीस वर्षों में मात्र ढाई वर्ष ही हिण्डोली को सत्ता का विधायक मिला। इस चुनाव में हाड़ौती की 17 में से कांग्रेस ने केवल हिण्डौली की ही सीट जीत थी।