नागौर. गोसेवा से कई दुष्कर कार्य भी सहज रूप से होने लगते हैं। गोसेवा अनिवार्य रूप से करनी चाहिए। संतान सुख से वंचित महिलाओं को भी गोसेवा से निश्चित पर इसका सुख प्राप्त हो जाता है। साध्वी श्रद्धा शुक्रवार को कांकरिया विद्यालय में गोकृपा कथा महोत्सव में गोसेवा की महत्ता समझा रहीं थीं। गोमाता की परिक्रमा से न केवल बच्चों में संस्कार आते हैं, बल्कि उनके अंदर सद्गुणों का विकास होता है। गाय के दूध की महत्ता बताते हुए कहा कि इस दूध के सेवन से प्रसव पीड़ा कम होने के साथ ही मां और बच्चा दोनों ही स्वस्थ रहते हंै। उन्होंने कहा देश के विभिन्न भागों से कन्या भू्रण हत्या के मामले सामने आते रहते हैं। वर्तमान में सिद्ध हो गया है कि बेटियां तो लडक़ों से भी ज्यादा उपयोगी एवं सामाजिक हित के प्रति संवेदनशील होती है। कार्यक्षेत्र में भी बेटियों ने अपनी उपयोगिता सिद्ध कर दी है। लडक़े और लड़कियों में भेद रखने वालों की मानसिकता को बीमार बताते हुए कहा कि हमें विकसित सोच रखनी होगी। कन्या भू्रण हत्या के खिलाफ व्यापक स्तर पर काम किए जाने की आवश्यकता जताई। कथा में संत जानकी दास महाराज, संत मुरलीराम, अनिता दीदी, जगवीर छाबा, दौलतराम सारण, दुर्गाप्रसाद पारीक, रामप्रकाश बिशु, प्रभुराम धुँधवाल, बीरबल कमेडिया, नृत्यगोपाल मित्तल,मंगलमय सेवा संस्थान से पारस मल परिहार, कमल भाटी, मनोज व्यास, किशोर मांजू, ओमप्रकाश डूकिया, हरिराम धारणीया, मेघराज राव, चरण प्रकाश डागा, जगदीश चारण आदि उपस्थित थे।
मूक बधिर बच्चों को भी समझाई जा रही कथा
कार्यक्रम में ही मूक बधिक बच्चों को भी प्रवचन दे रही कथा को उनके अध्यापक की अेार से इशारों की भाव-भंगिमा से अभिव्यक्त कर कथा की एक-एक लाइन बताई जा रही है। ताकी बच्चे भी गोकृपा कथा का महत्व समझ सके। नूतन प्रभात सेवा संस्थान के अध्यक्ष मुरली मनोहर टेलर ने बताया कि बच्चों को अलग से पंक्ति में बैठाकर कथापान के साथ उनके अंदर संस्कारों के बीच डाले जा रहे हैं। ताकी बच्चे भी इस कथा महोत्सव से वंचित न रह सकें।