मंदसौर.
हजारों की संख्या में खड़े भक्त, महादेव के गुंजते जयकारें, बजते घड़े-घडिय़ाल और स्वादिष्ट खिचड़ी और मालपूए की महक के बीच कोई कावड़ भरकर तो कोई पैदल चलकर बाबा का जलाअभिषेक करने बारिश में भीगते हुए पहुंचा। अलसुबह ५ बजे से रात ११ बजे तक मंदिर पर शिवभक्तों के आने का क्रम जारी रहा। यह नजारा था भगवान पशुपतिनाथ मंदिर का। सावन माह के दूसरे सोमवार को शिवभक्ति चरम पर पहुंची। बोल बम के जयकारों के बीच बाबा पशुपतिनाथ और सहस्त्र शिवलिंग मंदिर पर सवा लाख से अधिक भक्त पहुंचे।
माना जा रहा है कि अब तक की मंदिर पर यह सबसे अधिक भीड़ पहुंची है। हरियाली अमावस्या व सावन सोमवार करीब ५७ साल बाद एक ही दिन आए है। ऐसे में यहां भक्तों की भीड़ उमड़ी। तो वहीं अनंद सेना ने अमावस्या पर भगवान का हरे नोट से आकर्षण श्रृंगार किया गया। पशुपतिनाथ के साथ ही सहस्त्र शिवलिंग मंदिर पर भी जलाअभिषेक करने के साथ पूजा-अर्चना करने के लिए भक्त पहुंचे। मंदिर पर दिनभर लंबी कतारें लगी रही। आस्था का हुजूम पशुपतिनाथ मंदिर पर उमड़ा। तो बाबा का अलौकिक श्रृंगार किया गया।
अमावस्या व सोमवार के कारण अधिक भीड़
सावन सोमवार व हरियाली व सोमवती अमावस्या भी है। 57 साल बाद ऐसा संयोग बना है। जब सावन सोमवार के दिन सोमवती हरियाली अमावस्या पड़ी है। इससे पहले यह योग 1966 में बना था। सावन के दूसरे सोमवार पर भगवान पशुपतिनाथ मंदिर में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। सोमवार के साथ अमावस्या होने के कारण मंदिर पर अत्यधिक भीड़ रही। इसके साथ ही जिले के अन्य शिवालयों में भी बड़ी संख्या में भक्त दर्शन करने पहुंचे। सुबह अष्टमुखी भगवान पशुपतिनाथ को दूध दही शहद जल से स्नान कराया गया। दूसरे सोमवार को बड़ी संख्या में कावड़ यात्रियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। रिमझिम बारिश का दौर जारी रहा। बारिश के बीच शिवभक्त मन में आस्था लिए दर्शन करने के लिए पहुंची। मंदिरों में महिलाओं की भीड़ अधिक रही। इस दौरान सुरक्षा को लेकर भी चाक-चौबंध व्यवस्था थी। तीन थानों का पुलिस बल के अलावा सीसीटीवी कैमरों से लेकर अन्य विशेष सुरक्षा के इंतजार किए गए। भीड़ के चलते भक्तों को गर्भगृह में प्रवेश नहीं मिला और बाहर से ही दर्शन करना पड़े। मंदिर पर झिलमिलाती विद्युत रोशनी के बीच रात के समय भी शहर से कई भक्त पहुंचे।
500-500 के नोटों की पहनाई पगड़ी
भगवान पशुपतिनाथ का लक्ष्मी स्वरूप श्रृंगार किया गया। इस दौरान5 से लेकर 500 रुपए तक के नोटों से हुआ अष्टमुखी भगवान पशुपतिनाथ का श्रृंगार किया। अमावस्या पर सोमवार को पशुपतिनाथ महादेव का लक्ष्मी स्वरूप नोटों से अद्भुत श्रृंगार किया गया। भगवान पशुपतिनाथ को 500-500 रुपए के नोटों से बनी पगड़ी पहनाई गई तो वहीं 5, 10, 20 और 50 रुपए के नोटों से नयनाभिराम श्रृंगार किया गया। दोपहर 12 शुरू हुआ भगवान का श्रृंगार शाम 3 बजे तक चला। मंदिर पुजारी राकेश भट्ट ने बताया कि अनंत सेना सामाजिक संस्था द्वारा प्रतिवर्ष हरियाली अमावस्या के अवसर पर आयोजन किया जाता है। सोमवार को संस्था के द्वारा 5 रुपए से लेकर 500 रुपए तक के नोटों और भांग मेवा से भगवान का श्रृंगार किया गया है।