मऊ. धरती के भगवान कहे जानेवाले चिकित्सक मंगलवार को हड़ताल पर रहे। 12 घंटे की हड़ताल के कारण मरीजों की जान सांसत में रही। दूर-दराज से उपचार कराने पहुंचे मरीजों को फजीहत झेलनी पड़ी। हालांकि आपातकालीन चिकित्सा सेवा अबाध जारी रही, लेकिन ओपीडी ठप होने के कारण सामान्य मरीजों को बैरंग वापस लौटना पड़ा। निजी चिकित्सकों के भी हड़ताल का समर्थन करने से जनपद में चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त रही।
केंद्र सरकार द्वारा मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) को समाप्त कर नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) का गठन करने के ऐलान के खिलाफ चिकित्सकों ने हड़ताल की। नाराज चिकित्सकों ने काला दिवस मनाने के साथ ही के रुप में मनाते हुए कलेक्ट्रेट पर विरोध प्रदर्शन किया एवं सिटी मजिस्ट्रेट हंसराज को ज्ञापन सौंपा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित ज्ञापन में चिकित्सकों ने इसका कड़ा विरोध करते हुए पुरानी व्यवस्था को बरकरार रखने की मांग की है। इस संबंध में डॉक्टर एके रंजन ने बताया कि एमसीआई में केवल चिकित्सक ही शामिल थे। प्रस्तावित एनएमसी में चिकित्सकों के साथ ही राजनेताओं एवं अन्य को भी शामिल करने का प्रावधान है, जिनका चिकित्सा सेवाओं से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है। डॉक्टर एसएन शर्मा ने कहा कि सरकार ने अपना निर्णय वापस नहीं लिया, तो आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। सिटी मजिस्ट्रेट हंसराज ने चिकित्सकों को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों से शासन को अवगत करा दिया जाएगा।
इनपुट : विजय मिश्र