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VIDEO…राजस्थान रोडवेज को जरूरत 15 हजार बसों की, सरकार दे रही केवल आठ सौ, उम्मीदों पर फिरा पानी

नागौर. राजस्थान रोडवेज बेड़ें की इस समय 60 प्रतिशत से ज्यादा बसें कंडम की श्रेणी में आने के बाद भी सडक़ों पर चल रही हैं। स्थिति यह है कि प्रदेश के कुल 52 आगारों में इस समय एक हजार से ज्यादा कंडम बसें यात्रियों को गंतव्यों तक पहुंचाने के कार्य में लगी हुई हैं। स्थिति […]

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नागौर. राजस्थान रोडवेज बेड़ें की इस समय 60 प्रतिशत से ज्यादा बसें कंडम की श्रेणी में आने के बाद भी सडक़ों पर चल रही हैं। स्थिति यह है कि प्रदेश के कुल 52 आगारों में इस समय एक हजार से ज्यादा कंडम बसें यात्रियों को गंतव्यों तक पहुंचाने के कार्य में लगी हुई हैं। स्थिति यह है कई बसें राह चलते ही हांफ जाती हैं तो यात्रियों को दूसरे माध्यमों का सहारा लेकर अपने गंतव्यों तक पहुंचना पड़ रहा है। रोडवेज की सडक़ों पर चल रही कई बसें तो 14 साल की अवधि भी पूरी कर चुकी है। यानि की प्रावधान के अनुसार भी पूरी तरह से कंडम की श्रेणी में आने के बाद भी यह रोडवेज के बेड़े में शामिल हैं। हालांकि राजस्थान सरकार ने 500 नई बसें, 300 इलेक्ट्रिक बसें खरीदने के साथ ही 800 बसें किराए पर लिए जाने के लिए बजट में घोषणा जरूर की है, लेकिन जानकारों का मानना है कि यह कुल बसें रोडवेज को मिल भी जाती हैं तो भी रोडवेज के लिए ऊंट के मुंह में जीरा वाली स्थिति ही बनी रहेगी। कारण कि प्रदेश की जनसंख्या के मुकाबले बसों की उपलब्धतता 10 प्रतिशत भी नहीं रहेगी।
कंडम श्रेणी में आने के बाद भी सडक़ों पर चल रही बीमार बसें
प्रदेश में यात्रियों को रोडवेज की नकारा की श्रेणी में पहुंची बसों से सफर कराया जा रहा है। बताते हैं कि इन बसों में ज्यादातर की न केवल बाडी खराब हो चुकी है, बल्कि सीट कवर भी क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इन बसों के रोडवेज के स्टैंडों से निकलने के बाद गंतव्यों तक पहुंचने का भरोसा नहीं रहता र्है। स्थिति यह हो गई है कि कहीं बसों का स्टेयरिंग खराब हो जाता है तो कहीं कोई और तकनीकी खामी आ जाती है। इसकी वजह से अक्सर यात्रियों को बीच राह प्राइवेट बसों से सफर करना पड़ जाता है। हालांकि यह स्थिति केवल अजमेर, जोधपुर, पाली, सिरोही, राजसमंद एवं श्रीगंगानगर की ही नहीं, बल्कि राजधानी जयपुर के आगार की भी है। इसी से स्थिति का अंदाजा लगाया जा सका है।
प्रदेश के रोडवेज में उपलब्ध बसों के मॉडल पर एक नजर
वर्ष वाहन संख्या
2010 17
2011 10
2012 263
2013 959
2014 141
2015 10
2016 17
2017 492
2020 835

प्रदेश में कितनी संख्या में, कितनी चली बसें
चली बसों की किलोमीटर संख्या वाहनों की संख्या
आठ लाख किमी 993
आठ लाख से नौ लाख किमी 80
नौ लाख किमी से 10 लाख किमी 173
10 लाख से 11 लाख किमी 163
11 लाख से 12 लाख किमी 159
12 लाख किमी से अधिक 889

यह हैं प्रावधान
राजस्थान राज्य परिवहन निगम के अनुसार रुटों पर चलाने के लिए रोडवेज की बस आठ साल से ज्यादा पुरानी या नौ लाख से ज्यादा किलोमीटर नहीं निकाली हुई हो। ऐसी स्थिति होने पर बस को कंडम घोषित करने की सिफारिश की जाती है। क्योंकि बस का संचालन किए जाने से दुर्घटना का अंदेशा बन जाता है। इसकी वजह है अचानक चलती गाड़ी में ब्रेक गियर काम नहीं करता। बताते हंै कि लंबी दूरी वाली ज्यादातर बसों में बैटरी, वायरिंग गियर की समस्या रही है। चालक एवं परिचालकों को अक्सर बीच राह ही आगार के वर्कशॉप में बसों की जांच करानी पड़ती है।
रोडवेज की बेहतरी के लिए इतनी बसें चाहिए
राजस्थान परिवहन निगम संयुक्त कर्मचारी फैडरेशन के पदाधिकारियों के अनुसार वर्ष 1964 में राजस्थान रोडवेज की स्थापना हुई थी। उस समय प्रदेश में कुल 1500 बसें थी, और जनसंख्या करीब सवा करोड थी। जबकि वर्तमान में प्रदेश की जनसंख्या अनुमानत: करीब आठ से नौ करोड़ है। इस हिसाब से प्रदेश के रोडवेज बेड़ों को कम से कम 15 हजार बसें चाहिए। ऐसा होने पर ही रोडवेज की स्थिति बेहतर हो सकती है। उन्होंने यह बात सरकार के समक्ष रखी भी है। उम्मीद है कि सरकार इस पर ध्यान भी देगी तो स्थिति बेहतर होगी।

गुजरात मॉडल पर हो व्यवस्था
वर्तमान में रोडवेज के बिगड़े हुए ढांचे को सुधारने के लिए । सरकार को गुजरात मॉडल की तर्ज पर बजट प्रावधान में प्रति वर्ष 1000 बस नई खरीदने और अन्य संसाधन के लिए बैंक लोन गारंटी या वेतन ,पेंशन और सेवानिवृत भुगतान हेतु एक निश्चित राशि प्रतिवर्ष बजट में प्रावधान करने की आवश्यकता के साथ ही रोडवेज के सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जाने की दिशा में जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करने और कदम बढ़ाने की आवश्यकता है ।
सत्यनारायण शर्मा, प्रदेश महामंत्री, राजस्थान परिवहन निगम संयुक्त कर्मचारी फैडरेशन
इनका कहना है…
रोडवेज को सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जा रही बसों से स्थिति में सुधार तो निश्चित रूप से होगा। रोडवेज के बेड़े को और भी बसों की जरूरत है। इसके लिए विभाग की ओर से प्रयास भी किए जा रहे हैं। स्थिति जल्द ही सुधरने की पूरी उम्मीद है।
रवि सोनी, कार्यकारी निदेशक ( यांत्रिक) राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम जयपुर मुख्यालय