नागौर. दुलाया के पास नगरपरिषद की तीन बीघा भूमि पर वर्षों से जमे अवैध कब्जों पर सोमवार को आखिर बुलडोजर चल गया। सिटी पार्क के निकट स्थित इस भूखंड पर ठोस अपशिष्ट के लिए प्रस्तावित मैकेनिकल ट्रांसफर स्टेशन बनाया जाना है। रूपरेखा तैयार होते ही सामने आया कि पूरी जमीन पर कच्चे-पक्के निर्माण कर एक दर्जन से अधिक अवैध निर्माण खड़े कर दिए गए हैं। अपराह्न में परिषद का दस्ता पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचा और करीब डेढ़ घंटे चली कार्रवाई में सभी निर्माण ध्वस्त कर दिए गए।
दीवार पर चढ़ा विरोध, पुलिस ने संभाला मोर्चा
कार्रवाई शुरू होते ही विरोध की कोशिशें भी सामने आईं। अवैध कब्जा करने वालों में से एक व्यक्ति ऊंची दीवार पर चढकऱ विरोध जताने लगा। आयुक्त गोविंद सिंह भींचर ने उसे समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं माना। बाद में पुलिस की सहायता से उसे नीचे उतारा गया और जेसीबी मशीनों ने निर्माण तोडऩा शुरू कर दिया। दो जेसीबी लगातार चलीं और करीब पांच ट्राली मलबा हटाया गया। इसके बाद पूरा भूखंड साफ कर दिया गया।
सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर कब्जे का मामला
परिषद का कहना है कि यह भूमि सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित है और यहां ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की आधुनिक व्यवस्था विकसित की जानी है। अधिकारियों के अनुसार कब्जे पूरी तरह अवैध थे और पूर्व सूचना के बावजूद नहीं हटाए गए, जिसके चलते सख्त कार्रवाई करनी पड़ी।
कार्रवाई के बीच प्रशासनिक हलचल
कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक हलकों में हलचल भी रही। अतिक्रमण हटाने के बीच कोतवाली थानाधिकारी वेदपाल शिवरान और परिषद अधिकारियों के बीच किसी बात को लेकर गलतफहमी हो गई, जिसके कारण कुछ देर के लिए कार्रवाई प्रभावित हुई। हालांकि बाद में अधिकारी इसको सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा बताकर टाल गए।
सफाईकर्मी पहुंचे कलक्ट्रेट, बंद कमरे में वार्ता
बहस की खबर फैलते ही सफाईकर्मी विरोध स्वरूप कलक्ट्रेट पहुंच गए। बंद कमरे में करीब पौन घंटे तक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आसाराम चौधरी और सीओ धर्मसिंह पूनिया की मौजूदगी में बातचीत चली। बैठक के बाद अधिकारियों ने कहा कि कोई गंभीर विवाद नहीं था और यह नियमित प्रशासनिक समन्वय का हिस्सा था।