नागौर. शहर की व्यस्ततम सडक़ें इस बार की बरसात भी नहीं झेल पाईं। बारिश के साथ ही सडक़ें बह गईं और जगह-जगह गड्ढों में तब्दील हो गईं। इनमें से तीन प्रमुख मार्ग अभी गारंटीशुदा अवधि में ही हैं, लेकिन निर्माण के समय किए गए पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के गुणवत्ता के दावे अब खुले में आ गए हैं।
शहर के प्रमुख मार्ग शारदापुरम से माही दरवाजा, अहिंसा सर्किल से नया दरवाजा और नया दरवाजा से माही दरवाजा तक की सडक़ें कुछ समय पहले ही बनाई गई थीं। शुरुआत में स्थिति ठीक रही, लेकिन पहली बरसात में ही सडक़ें उखड़ गईं। इन मार्गों पर दर्जनों गड्ढे हो गए हैं, जिससे दोपहिया और चारपहिया वाहन नाव की तरह हिचकोले खाते हुए गुजरने को मजबूर हैं। हादसे भी आम हो गए हैं। अहिंसा सर्किल से नया दरवाजा मार्ग पर 20 मीटर तक कंक्रीट पूरी तरह से उखड़ चुकी है, जबकि हनुमान मंदिर तक गड्ढे ही गड्ढे दिखाई देते हैं। नया दरवाजा से माही दरवाजा मार्ग पर भूतनाथ मंदिर के पास 30 मीटर से अधिक हिस्से में गड्ढे लाइन से बने हुए हैं। माही दरवाजा से शारदापुरम मार्ग की हालत तो और भी बदतर है। यहां हर कुछ कदम पर बड़े गड्ढे मिलते हैं। सर्किल के पहले 100 मीटर से ज्यादा हिस्से में तो सडक़ पूरी तरह गायब हो चुकी है। इस मार्ग से न केवल शहर बल्कि आसपास के दर्जनों गांव जुड़े हैं, जिससे आवाजाही बेहद कठिन हो गई है। बाड़ी कुआं क्षेत्र की सडक़ पर भी दर्जनों गड्ढे बन चुके हैं। यहां सीवरेज चैंबर से लगातार बहते पानी ने हालात और खराब कर दिए हैं। वहीं दूसरी ओर वीआईपी इलाकों पर विभाग ज्यादा ध्यान देता नजर आया। सर्किट हाउस के सामने अमर सिंह कॉलोनी रोड पहले से ठीक थी, बारिश में भी खराब नहीं हुई, लेकिन वहां इंटरलॉकिंग सडक़ बनाई जा रही है। इसके उलट शहर के अन्य हिस्सों की टूटी सडक़ों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा।
बारिश के दौरान सडक़ों की दुर्दशा को लेकर पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता को ज्ञापन भी सौंपा गया। इसमें मांग की गई कि खराब हुई सडक़ों को तुरंत दुरुस्त किया जाए। ज्ञापन देने वालों में कपिल तोलावत, पार्षद यतीराज धनावत, भाजपा युवा मोर्चा जिलामंत्री दीपक सोनी, अविनाश बिंजावत और भास्कर खजांची मौजूद रहे।