शरद शुक्ला
नागौर. प्रदेश में राज्यकर विभाग की ओर से की जाने वाली सर्वे की कार्रवाई पर पिछले एक साल से अघोषित रोक होने से जीएसटी चोरी करने वालों के हौंसले बुलंद हैं। सर्वे और रोड चैकिंग नहीं होने से कुछ लोहा, सीमेंट, पान मसाला, गुटखा आदि के कारोबारी खुलेआम टैक्स चोरी कर रहे हैं। परिणाम स्वरूप सरकार को हर दिन करोड़ों रुपए का राजस्व नुकसान झेलना पड़ रहा है।
बिगड़ रहे हालात, खामोश जिम्मेदार
प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में जीएसटी सर्वे पर अघोषित रोक से राजस्व में भारी गिरावट आई है। जुलाई 2024 से राज्य के संभागीय कर आयुक्तों को सर्वे नहीं करने के मौखिक निर्देश दिए गए थे। उसके बाद से राजस्व संग्रह में 14 प्रतिशत की गिरावट आई है। जानकारों का कहना है कि सर्वे बंद होने से वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की चोरी बढ़ी है।
जुलाई 2024 से संभाग स्तरीय एवं सीटीओ स्तर के अधिकारियों पर लगी है रोक
निदेशालय के दिशा-निर्देश पर आवश्यक होने पर सर्वे की कार्रवाई करते हैं। सर्वे प्रावधानों को ध्यान में रखकर होता है। जुलाई 2024 से राज्य में केाई सर्वे नहीं किया गया। अघोषित रूप से रोक लगी है। कारण राज्य के किसी भी डीसी यानि की संभाग स्तरीय अधिकारियों को भी बिना मुख्यालय अब सर्वे करने की अनुमति नहीं है। यही वजह रही कि उक्त समयावधि से कोई सर्वे नहीं किया गया। हाल ही में भीलवाड़ा में आई केन्द्रीय दल की ओर से की गई विशेष कार्रवाई में इसका खुलासा भी हुआ था। इस संबंध में विभाग की ओर से संभाग स्तर या सीटीओ स्तर पर कार्रवाई का विवरण मांगा गया, लेकिन विभाग एक भी जिले में इन अधिकारियों के स्तर पर हुई कार्रवाई के न तो आंकड़े दे पाया, और नही कोई तथ्यात्मक विवरण। इससे स्पष्ट प्रतीत होता है कि अब संभाग स्तरीय व सीटीओ स्तर के अधिकारियों से पिछले एक साल से सर्वे करने का अधिकार छीन लिया गया, जबकि इसके पूर्व सर्वे किया जा रहा था।
प्रति वर्ष राज्य का घटता राजस्व औसत
2022-23 32,310 2.3 प्रतिश
2023-24 24,896 1.6 प्रतिशत
2024-25 25,758 1.4 प्रतिशत
सर्वेक्षण की प्रक्रिया: ऐसे होता है सर्वे
स्टेट टैक्स विभाग की ओर से संदिग्ध लेनदेन करने वाले करदाता का चयन किया जाता है। इसमें जीएसटी रिटर्न में विसंगति, ई-वे बिल में त्रुटियाँ अथवा गुप्त सूचना के आधार पर चयन किया जाता है। इसके बाद स्थल पर निरीक्षण किया जाता है। इसके बाद पूर्व में सूचना दिए बिना टीम संबंधित व्यवसाय स्थल पर पहुँचती है। माल, स्टॉक, नकद व अभिलेखों की जाँच की जाती है। इलेक्ट्रॉनिक डाटा व कंप्यूटर प्रणाली की भी समीक्षा होती है। आवश्यक कार्रवाई के तहत आवश्यक होने पर दस्तावेज़ जब्त किए जाते हैं। निरीक्षण रिपोर्ट तैयार की जाती है।
रोड चेकिंग की प्रक्रिया
विभाग की ओर से स्थान चयन कर प्रमुख व्यापारिक मार्गों, सीमावर्ती क्षेत्रों एवं मंडियों में अभियान चलाया जाता है। जांच में दस्तावेज़ सत्यापन के लिए वाहन में लदे माल के दस्तावेज़ जैसे ई-वे बिल, कर चालान आदि की जाँच होती है। चालक से पूछताछ कर माल व दस्तावेज़ का मिलान किया जाता है। कार्रवाई करते हुए अनियमितता पाए जाने पर माल जब्त, पेनल्टी लगाई जाती है। टैक्स की वसूली कर विभागीय रिपोर्ट तैयार की जाती है।
यह पड़ रहा प्रभाव
सूत्रों के अनुसार सर्वे पर रोक लगने से राज्य सरकार को राजस्व नुकसान हुआ है। इसका विकास योजनाओं पर असर पड़ा है। स्वास्थ्य व शिक्षा के खर्चे को लेकर वित्तीय गणित बिगड़ गया है।
इनका कहना है…
सर्वे के लिए उच्चाधिकारियों की ओर से मिलने वाले दिशा-निर्देश की पालना की जाती है। इस संबंध में इनपुट मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। फिलहाल कोई सर्वे नहीं किया गया है।
भारत सिंह राजपुरोहित, संयुक्त आयुक्त, राज्य कर विभाग, नागौर
निदेशालय के दिशा-निर्देश पर आवश्यक होने पर सर्वे की कार्रवाई करते हैं। सर्वे प्रावधानों को ध्यान में रखकर होता है। काफी समय समय से सर्वे नहीं किया गया है।
पूरण सिंह, अतिरिक्त कमिश्नर, राज्य कर विभाग, अजमेर संभाग