नागौर. शहर की सडक़ों पर यातायात व्यवस्था बिना किसी ट्रैफिक संकेतकों के चल रही है। प्रमुख चौराहों, कट पॉइंट और व्यस्त सडक़ों पर चेतावनी बोर्ड, दिशा संकेत और स्पीड लिमिट बोर्ड का पूरी तरह से गायब नजर आते हैं। यह स्थिति तब है,ज बकि दोपहिया, कार, ऑटो, ई-रिक्शा और भारी वाहनों की संख्या तो बढ़ी है, लेकिन उसी अनुपात में ट्रैफिक प्रबंधन और सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए। कई चौराहों पर न तो स्पीड लिमिट बोर्ड लगे हैं और न ही मोड़ या क्रॉसिंग की चेतावनी। खासतौर पर बाहरी क्षेत्रों से आने वाले वाहन चालकों के लिए मुश्किल की स्थिति बन जाती है, क्योंकि उन्हें स्थानीय सडक़ों की जानकारी नहीं होती।
शहर की सडक़ों पर यातायात व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है। प्रमुख चौराहों, व्यस्त सडक़ों और कट पॉइंट्स पर ट्रैफिक संकेतक, चेतावनी बोर्ड और दिशा सूचक चिह्नों का अभाव होने के चलते यातायात व्यवस्था की स्थिति विकट होने लगी है। इनको नहीं लगाए जाने के चलते वाहन चालक और पैदल यात्री बिना किसी स्पष्ट मार्गदर्शन के सफर करने को मजबूर हैं। शहर के कई मुख्य चौराहों एवं घुमावदार मोड़ों पर सडक़ सुरक्षा के न्यूनतम मानक भी पूरे नहीं किए जाने से हादसों की आशंका बनी रहती है।
प्रमुख मार्गों की यह है स्थिति
रेलवे स्टेशन चौराहा, बस स्टैंड रोड का मुख्य प्रवेश मार्ग, जिला अस्पताल के सामने की सडक़, कलेक्ट्रेट-कोर्ट रोड जंक्शन, मानासर चौराहा, गोगेलाव रोड का कट पॉइंट, मूंडवा रोड का शहर प्रवेश क्षेत्र, जोधपुर बायपास से शहर की कनेक्टिंग रोड, पुराना शहर बाजार क्षेत्र और स्कूल-कॉलेज ज़ोन सरीखे महत्वपूर्ण स्थानों पर ट्रैफिक संकेतकों की तलाश करने पर भी नहीं नजर आते हैं है। जबकि इन क्षेत्रों में दिनभर भारी आवाजाही रहती है, लेकिन वाहन चालकों को दिशा बताने या गति नियंत्रित करने के लिए कोई स्पष्ट संकेत मौजूद नहीं होना खुद-ब-खुद यातायात व्यवस्था की पोल खोल खोलता नजर आ रहा है।
जिला अस्पताल का भी नहीं रखा ध्यान
जिला अस्पताल के सामने साइलेंट जोन और स्पीड लिमिट के बोर्ड नहीं होने से मरीजों, तीमारदारों और एंबुलेंस को परेशानी का सामना करना पड़ता है। बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन के आसपास ऑटो और निजी वाहनों की भीड़ रहती है, लेकिन पार्किंग, वन-वे या रुकने की सीमा से जुड़े बोर्ड नदारद हैं। बाजार क्षेत्र में पैदल यात्रियों और वाहनों का मिलाजुला यातायात चलता है। इसके चलते जाम भी लगता रहता है। स्थिति यह है कि शहर क्षेत्र में देखने पर भी कहीं भी पैदल पार पथ और नो-पार्किंग संकेत दिखाई नहीं देते हैं।
रात के समय स्थिति खतरनाक
रात के समय स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है। कई जगह रिफ्लेक्टिव बोर्ड और रोड मार्किंग नहीं होने से सडक़ के मोड़, कट और स्पीड ब्रेकर समय पर दिखाई नहीं देते। इससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार मामूली चूक बड़े हादसे का कारण बन सकती है, लेकिन जिम्मेदार विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहे।
ट्रेफिक, दिशा संकेतक बोर्ड आदि के लिए इससे जुड़े विभागों को पूरी व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए निर्देश दिए जाएंगे।
गोविंद सिंह भींचर, उपखण्ड अधिकारी नागौर