नागौर. जन्माष्टमी भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि यानि की सोमवार को मनाई जाएगी। इस दिन रोहिणी नक्षत्र में आधी रात को भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। इसे कृष्ण जन्माष्टमी, गोकुलाष्टमी,अष्टमी रोहिणी, श्री कृष्ण जयंती के नाम से भी जाना जाता है। अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र का मिलना दुर्लभ संयोग है। इस बार जन्माष्टमी रोहिणी नक्षत्र में ही मनाई जाएगी। यह शुभ फलदायी है। पंडित सुनील दाधीच ने बताया कि अष्टमी तिथि 26 अगस्त की मध्य रात्रि बाद 3 बजकर 39 मिनट से प्रारंभ होकर 27 अगस्त की सुबह 2 बजकर 19 मिनट पर समाप्त होगी। जन्माष्टमी के दिन रोहिणी नक्षत्र 26 अगस्त की दोपहर 3 बजकर 55 मिनट से आरंभ होकर 27 अगस्त की दोपहर 3 बजकर 38 मिनट पर समाप्त होगा। यह भगवान कृष्ण का 5251 वां जन्मोत्सव होगा। इस दिन चार विशिष्ट संयोग भी बन रहे हैं। भगवान कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस बार रोहिणी नक्षत्र दोपहर 3 बजकर 56 मिनट से शुरू हो जाएगा। इस प्रकार अर्ध रात्रि में अष्टमी तिथि रोहिणी नक्षत्र साथ ही सोमवार का दिन मिल जाने से जयंती योग का उत्तम अवसर प्राप्त हो रहा है। इस संयोग के कारण इस दिन पूजा और उपासना का विशेष महत्व रहेगा। इसके साथ ही अष्टमी तिथि का भी संयोग बन रहा है। अष्टमी तिथि भी इस दिन मध्य रात्रि बाद 2 बजकर 20 मिनट तक रहेगी। भगवान कृष्ण का जन्म वृषभ राशि में हुआ था। और इस बार भी चंद्रमा वृषभ राशि में ही रहेगा। जन्माष्टमी के दिन सूर्य उदय से लेकर दोपहर 3 बजकर 55 मिनट तक सुस्थिर योग तथा 3 बजकर 55 मिनट से लेकर दूसरे दिन सूर्योदय तक प्रवर्ध नामक योग बन रहे हैं। यह दोनों ही योग शुभ माने जाते हैं साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग भी इस दिन बन रहा है। इन शुभ संयोगों के बीच जन्माष्टमी पर पूजन एवं उपवास विशेष रूप से फलदायी रहेंगे। जो श्री कृष्ण जन्माष्टमी के शुभ प्रभाव को बढ़ाता है