नागौर. सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील का पोषाहार पकाने वाली कुक कम हैल्पर को एक तो नरेगा श्रमिक से आधे से भी कम मानदेय दे रहे हैं और दूसरा वो भी समय पर नहीं मिल रहा है। नागौर ब्लॉक की स्कूलों में दोपहर का खाना पकाने वाली कुक कम हैल्पर को अप्रेल 2024 से मानदेय का भुगतान नहीं दिया गया है, ऐसे में उनके लिए दीपावली मनाना मुश्किल हो रहा है।
गौरतलब है कि राज्य सरकार की बजट घोषणा के अनुसार प्रदेश में एक अप्रेल से कुक कम हैल्पर का मानदेय बढ़ाकर 2143 रुपए प्रति माह किया गया था, जो दस महीने के लिए ही दिया जाता है। इस हिसाब से एक दिन की मजदूरी देखें तो पूरे 83 रुपए भी नहीं मिलते, जबकि नरेगा श्रमिक की मजदूरी 200 रुपए से अधिक है। एक तरफ सरकार न्यूनतम मजदूरी की बात करती है और दूसरी तरफ सरकारी स्कूलों में ही काम करने वाली कुक कम हैल्पर को न्यूनतम मजदूरी का आधा भी नहीं मिल रहा है। जो मानदेय दिया जा रहा है, वो भी समय पर नहीं देने से उनका घर चलाना मुश्किल हो रहा है। नागौर ब्लॉक में मार्च 2024 के बाद यानी जब से मानदेय बढ़ाया है, तब से एक बार भी नहीं दिया। जबकि जिले के अन्य ब्लॉक में भी पिछले करीब तीन-चार महीने से कुक कम हैल्पर को मानदेय नहीं दिया गया है।
पूरे प्रदेश में यही हाल
ज्यादातर महिला कुक कम हैल्पर तो ऐसी हैं, जिनका पूरा समय ही स्कूल में खप जाता है और वे दूसरा कार्य नहीं कर पाती हैं। प्रदेश में अकुशल श्रमिक की न्यूनतम मजदूरी 285 रुपए है, जिसके हिसाब से महीने के 26 दिन की मजदूरी 7410 रुपए होती है, लेकिन यहां तीसरा हिस्सा भी नहीं दिया जा रहा है। यानी राज्य सरकार खुद के आदेशों की धज्जियां उड़ा रही है। नागौर ही नहीं पूरे प्रदेश में यही हाल है, कहीं छह महीने का भुगतान नहीं मिला तो कहीं तीन-चार महीने से भुगतान नहीं दिया गया है।
यह आ रही है तकनीकी परेशानी
शिक्षा विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नागौर ब्लॉक में 31 मार्च 2024 के बाद कुक कम हैल्परों का मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है। जिले के अन्य ब्लॉक में कहीं तीन तो कहीं चार महीने से मानदेय अटका हुआ है। इसकी प्रमुख वजह पोर्टल पर जानकारी अपडेट नहीं होना है। सरकार के आदेशानुसार एक अप्रेल 2024 से राजस्थान के प्रत्येक विद्यालय के संस्था प्रधान की एसएसओ आईडी से राज सिम्स पोर्टल पर एमडीएम का प्रारम्भिक शेष दर्ज करके उसके बाद प्रत्येक कार्य दिवस को एमडीएम से लाभान्वित विद्यार्थी की जानकारी दर्ज करनी होती है। साथ ही सप्लाई में प्राप्त गेहूं, चावल भी इस पोर्टल पर उसी दिन से अपडेट करना है। इसमें कुछ परेशानी फिडिंग में आ रही है तो कुछ संस्था प्रधान अभी तक इसको अपडेट नहीं कर पाए हैं।
समय पर नहीं मिलता मानदेय
सरकारी विद्यालय में पोषाहार पकाने का काम करते हैं। यहां काम करने के बाद दूसरी जगह जा नहीं सकते। पिछले पांच-छह महीने से मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है, ऐसे में परिवार का गुजारा चलाना मुश्किल हो रहा है। आगे दीपावली भी है, छोटे-छोटे बच्चे हैं।
– संतोष व सुमन, कुक कम हैल्पर