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वीडियो : ये कैसी शिक्षा नीति : 10 महीने में छह महीने परीक्षा, फिर कब पढ़ेंगे विद्यार्थी

जिन विद्यार्थियों के जुलाई से लगनी थी द्वितीय वर्ष की कक्षाएं, वो प्रथम वर्ष के द्वितीय सेमेस्टर की दे रहे परीक्षा, प्रथम वर्ष के अब तक हो रहे प्रवेश, जिला मुख्यालय की नोडल कॉलेज सालभर चल रही परीक्षाएं, पढ़ाई का बंटाधार, विद्यार्थियों की पीड़ा - 75 फीसदी हाजिरी कैसे करें पूरी

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नागौर. कॉलेज शिक्षा में पिछले साल से लागू की गई नई शिक्षा नीति की पालना में राज्य सरकार का उच्च शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालयों में आपसी समन्वय नहीं होने से शिक्षण व्यवस्था बेपटरी हो रही है। न तो समय पर प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो रही है और न ही परीक्षाएं। ऐसे में शिक्षण व्यवस्था सुधरने की बजाए उल्टा बिगड़ रही है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले साल प्रथम वर्ष में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को जहां वर्तमान में द्वितीय वर्ष की पढ़ाई करानी थी, वहां आधा सत्र बीतने के बावजूद प्रथम वर्ष के प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं हो रही हैं। यही नहीं इस वर्ष प्रथम वर्ष में प्रवेश देने की प्रक्रिया अब भी चल रही है। इसी प्रकार एमए पूर्वाद्र्ध में भी इन दिनों प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। इसकी वजह स्नातक अंतिम वर्ष की परीक्षाएं समय पर नहीं होने के कारण परिणाम समय पर जारी नहीं हो सका और परिणाम देरी जारी होने के कारण एमए में प्रवेश प्रक्रिया अब चल रही है।

गौरतलब है कि नई शिक्षा नीति में सेमेस्टर व्यवस्था लागू की गई है, जिसमें दो सेमेस्टर के लिए साल में दो बार परीक्षाएं होती हैं, पहले सेसेस्टर की दिसम्बर माह में और दूसरे सेमेस्टर की जून माह में। लेकिन हो यह रहा है कि जून में होने वाली द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षाएं नवम्बर माह में हो रही है। वहीं दूसरी ओर शिक्षण कार्य के लिए 10 महीने मिलते हैं, जिनमें छह महीने तो परीक्षाएं हो रही हैं। शेष बचे चार महीने में लगभग एक महीने छुट्टियां आ जाती है, जबकि प्रति सेमेस्टर तीन महीने यानी 90 शिक्षण दिवस होना अनिवार्य है। ऐसे में तीन महीने में 180 दिन शिक्षण दिवस कैसे होंगे, यह तो सरकार ही बता सकती है।

नवम्बर में प्रवेश, दिसम्बर में परीक्षा

सरकारी कॉलेजों में प्रथम वर्ष में खाली रही सीटों पर प्रवेश के लिए कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय ने अब ऑफलाइन आवेदन मांगे हैं। इससे एक ओर जहां नवम्बर का दूसरा सप्ताह प्रवेश में ही बीतने वाला है, वहीं आने वाले दिनों में अध्ययन के साथ प्रेक्टिकल वर्क और फिर एनईपी के अनुसार इंटरनल परीक्षाएं होने के बाद दिसम्बर में पहले सेमेस्टर की परीक्षाएं भी करवानी हैं, जो विद्यार्थियों के साथ कॉलेज प्रबंधन के लिए भी बड़ी चुनौती होगी। गौरतलब है कि कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय के निर्देश पर 6 से 11 नवम्बर तक प्रथम वर्ष की रिक्त सीटों पर ऑफलाइन आवेदन मांगे गए हैं। इसके बाद दो दिन में दस्तावेज सत्यापन और शुल्क जमा कराने को मिलेंगे और फिर 14 नवम्बर को प्रवेशित विद्यार्थियों की सूची जारी की जाएगी।

स्नातक प्रथम वर्ष प्रवेश प्रक्रिया पर एक नजर

प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ – 7 जून

अंतिम प्रवेश तिथि – 14 नवम्बर

सेमेस्टर के लिए जरूरी शिक्षण कार्य – 90 दिन

प्रवेश प्रक्रिया में बीता समय – 160 दिन

सुधरने की बजाए बिगड़ गया कॉलेज शिक्षा का ढर्रा

सरकार ने जब से नई शिक्षा नीति लागू की है, तब से कॉलेज शिक्षा का पूरा ढर्रा ही बिगड़ गया है। न तो समय पर प्रवेश हो पाते हैं और न ही परीक्षाएं। मिर्धा कॉलेज में 10 महीने में से छह महीने तो परीक्षाएं हो रही हैं, ऐसे में शिक्षण कार्य कब होगा, यह सोचने वाला विषय है। अगले महीने प्रथम वर्ष के प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा होनी है और अभी प्रवेश चल रहे हैं। पिछले साल जिन्होंने प्रथम वर्ष में प्रवेश लिया था, उनके द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षाएं अब हो रही हैं, जो जून माह में होनी थी।

– अनुष्का, कॉलेज छात्रा, नागौर

समय पर हो परीक्षाएं

हां, यह सही है कि परीक्षाएं समय पर नहीं हो रही हैं। विश्वविद्यालय को परीक्षाएं समय पर करानी चाहिए, ताकि प्रवेश प्रक्रिया सहित अन्य शैक्षणिक गतिविधियां समय करवाई जा सकें।

– डॉ. हरसुखराम छरंग, प्राचार्य, श्री बीआर मिर्धा राजकीय महाविद्यालय, नागौर