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Nagaur patrika…नागौर में पैदल चलना बना खतरे का सफर, जिला मुख्यालय की सडक़ों पर हर कदम दांव पर…VIDEO

नागौर. शहर के सबसे व्यस्त मार्ग अब पैदल राहगीरों के लिए असुरक्षा का पर्याय बन चुके हैं। गौरव पथ से गांधी चौक तक की जमीनी पड़ताल ने स्पष्ट कर दिया कि जिला मुख्यालय में ही पैदल चलने की व्यवस्था लगभग समाप्त हो चुकी है। सडक़ें वाहनों से भरी हैं, लेकिन पैदल बाजार जाने वाला व्यक्ति […]

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नागौर. शहर के सबसे व्यस्त मार्ग अब पैदल राहगीरों के लिए असुरक्षा का पर्याय बन चुके हैं। गौरव पथ से गांधी चौक तक की जमीनी पड़ताल ने स्पष्ट कर दिया कि जिला मुख्यालय में ही पैदल चलने की व्यवस्था लगभग समाप्त हो चुकी है। सडक़ें वाहनों से भरी हैं, लेकिन पैदल बाजार जाने वाला व्यक्ति हर पल खुद को जोखिम में पाता है। प्रशासनिक दफ्तरों से घिरे इस इलाके में हालात ऐसे हैं कि सुरक्षित पहुंच की कोई गारंटी नहीं बची।

गौरव पथ पर चौड़ाई कागजों में, जमीन पर कब्जे
सुगन सिंह सर्किल के पास रेलवे लाइन किनारे से गुजरने वाला गौरव पथ देखने में चौड़ा है, पर किनारों पर अतिक्रमण ने पैदल रास्ते समेट दिए हैं। निजी अस्पतालों के सामने फुटपाथ जैसी जगहें पार्किंग या अस्थायी ढांचों में बदल चुकी हैं। जहां राहगीर चल सकते थे, वहां वाहन खड़े हैं। मजबूरी में लोगों को सडक़ की मुख्य धारा में उतरना पड़ता है, जहां तेज रफ्तार गाडिय़ां लगातार गुजरती रहती हैं।

कांकरिया विद्यालय क्षेत्र में पैदल निकलना चुनौती
कांकरिया विद्यालय के पास बाजार हिस्से में फुटपाथ पूरी तरह पार्किंग में तब्दील है। एक प्रमुख मिठाई दुकान के सामने दोपहिया और चारपहिया वाहनों की कतार लगी रहती है। स्टेशन रोड से आने वाले लोग जब इस हिस्से में पहुंचते हैं तो उन्हें चलती गाडिय़ों के बीच से रास्ता बनाना पड़ता है। सोमवार को भी यही दृश्य रहा। हल्की सी चूक बड़ा हादसा बन सकती है, फिर भी स्थिति जस की तस है।

किले की ढाल पर अवैध विस्तार से संकरी सडक़
किले की ढाल के आसपास दुकानों और शोरूम की पंक्ति ने मार्ग को और संकरा कर दिया है। गांधी चौक और नकासगेट के बीच पैदल चलने की अलग जगह नहीं बची। कई स्थानों पर कच्चे और पक्के निर्माणों ने फुटपाथ निगल लिया है। हाल ही में शिवबाड़ी के पास एक युवक वाहन की चपेट में आया, लेकिन चेतावनी के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटे। यहां पैदल चलना सीधे यातायात के बीच से गुजरना है।

पुराना जिला अस्पताल क्षेत्र में हर समय दबाव
पुराने जिला अस्पताल के सामने सडक़ दिनभर वाहनों से भरी रहती है। दुकानों के आगे खड़े वाहन मार्ग की चौड़ाई कम कर देते हैं। बीकानेर रोड, नया दरवाजा, कलक्ट्रेट और स्टेशन रोड से आने-जाने वाले वाहनों के बीच मरीज और परिजन असमंजस में खड़े दिखाई देते हैं। अस्पताल जैसे संवेदनशील क्षेत्र में भी पैदल सुरक्षा की स्पष्ट व्यवस्था नजर नहीं आती।

रामपोल चौराहा बना जोखिम का केंद्र
रामपोल चौराहा शहर के व्यस्ततम बिंदुओं में है। दोनों ओर स्थायी निर्माणों ने सडक़ को गली जैसा रूप दे दिया है। तेज रफ्तार दोपहिया वाहनों के बीच पैदल चलने की गुंजाइश बेहद कम है। सोमवार को गांधी चौक की ओर जा रहा एक राहगीर बाइक से टकरा गया। गंभीर चोट नहीं लगी, लेकिन यह घटना बताती है कि यहां अनहोनी किसी भी क्षण संभव है।