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नम हुई आंखों के संग तलवार के साथ चल रही लाठियों से निकल रही थी आग
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नम हुई आंखों के संग तलवार के साथ चल रही लाठियों से निकल रही थी आग

नागौर. इमाम हुसैन की याद में मोहर्रम पूरे अकीदत के साथ मनाया गया। इस मौके पर अपने-अपने मुकाम से मातमी धुन के साथ निकला ताजिया का जुलूस। जुलूस विभिन्न मार्गों से होता हुआ रात में माही दरवाजा पहुंचा। माही दरवाजा पहुंचने के बाद ताजियों को सैराब किया गया। इस दौरान ताजिये के नीचे से गुजरने […]

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नागौर. इमाम हुसैन की याद में मोहर्रम पूरे अकीदत के साथ मनाया गया। इस मौके पर अपने-अपने मुकाम से मातमी धुन के साथ निकला ताजिया का जुलूस। जुलूस विभिन्न मार्गों से होता हुआ रात में माही दरवाजा पहुंचा। माही दरवाजा पहुंचने के बाद ताजियों को सैराब किया गया। इस दौरान ताजिये के नीचे से गुजरने व छूने की अकीदतमंदों में होड़ लगी नजर आई। सडक़ों पर चारो ओर अकीदतमंदों की भीड़ रही। ताजिया निकलने के दौरान सडक़ों के दोनो ओर के साथ ही छतों पर भी ताजिया देखने के लिए लोग डटे रहे। इसके साथ ही अखाड़ों में हैरतअंगेज करतब भी दिखाए गए।
ताजियों का जुलूस दोपहर में करीब दो बजे अपने मुकाम से अकीदतमंदों के साथ मातमी धुनों के बीच रवाना हुए। वातावरण में गूंजते मातमी धुनों के बीच याद करते हुए मुस्लिम समुदाय के मातम से माहौल बदला नजर आया। जुलूस में नकास, घोसीवाड़ा , सर्राफे दरवाजा अजमेरी गेट ,दरगाह डोडी,दड़ा मोहल्ला, दरगाह बड़े पीर साहब , पिंजरों का मोहल्ला ,बाजरवाड़ा आदि इलाक़ो के ताजिये शामिल हुए। अपने मुकामों से निकले ताजियों का यह जुलूस विभिन्न मार्गों से होते हुए काजियों का चौक एवं बाजरवाड़ा होते हुए माही दरवाजा पहुंचे। यहां से ताजियों को कर्बला में सैराब करने के लिए ले जाया गया। ताजियों के निकले जुलूस के साथ अकीदतमंद या हुसैन को याद करते रहे। इससे पूरा वातावरण गूंजता रहा। न्यारों का मोहल्ला का ताजिया अपने इलाके में घुमाया गया। लोहारपुरा का ताजिया तोप चौक में जियारत के लिए रखा गया है। इसे गुरुवार को सुबह सैराब किया जाएगा। जुलूस का कई जगहों पर हिंदू समुदाय के लोगों ने भी स्वागत किया।
विशेष पकवान बनाए गए
हुसैन की याद में बुधवार को मुस्लिम बहुल इलाकों में विभिन्न कार्यक्रम हुए। ताजियों का जुलूस निकलने वाले रास्ते में विशेष पकवान हलीम, शरबत व पानी छबील की विशेष छबील भी लगाई गई। काजियों का चौक, पिंजारों का मोहल्ला एवं बारवाड़ा में अखाड़ेबाजों ने अपने करतब दिखाए। अखाड़े में तलवारबाजी के साथ लाठियों को कलात्मक तरीके से युवा चलाते नजर आए। कुछ जगहों पर युवा हुसैन की शहादत को याद कर अपने चोटिल करने के साथ मातम करते नजर आए। अखाड़ेबाजों के करतब को देखने के लिए देर रात्रि तक लोगों की भीड़ लगी रही। काजियों का चौक अखाड़े में करतबाजों ने लाठियों को मशाल की तर्ज पर जलाकर शानदार करतब दिखाए। तलवारबाजी भी आकर्षण का केन्द्र रहा। ड्योडी पीर दरगाह में भी अखाड़ेबाजों ने तलवारबाजी की। इस दौरान मन्नतों के अनुसार विशेष पकवान बनाए जाने के साथ ही विशेष फातिहा ख्वानी के आयोजन भी हुए।
हुसैन की जिंदगी नसीहत
मोहर्रम पर दरगाह और मस्जिदों में विशेष महफिलों का आयोजन भी किया गया। इन महफिलों में बताया कि पैगंबर इस्लाम मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नवासे हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का कर्बला के मैदान में कत्ल कर दिया था। इसके बाद भी सच्चाई और ईमानदारी का साथ नहीं छोड़ा। इसलिए आज हम लोगों को चाहिए कि हम भी ईमानदार और सच्चे लोगों के साथ रहे। उलेमाओं ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने कर्बला की मैदान में गरीबों की मदद करने का संदेश दिया। इसलिए हम लोगों को चाहिए कि हम लोगों का पड़ोसी चाहे से कोई भी मजहब से तालुक रखता हो उसकी मदद करें।
ताजिया में नजर आई मलेशिया की मस्जिद
ड्योडी पीर की दरगाह में ख्वाजा गरीब नवाज की बारादरी एवं मलेशिया की मस्जिद के साथ ही कर्बला का नक्शा भी बनाया गया था। इससे यह ताजिया आकर्षण का केन्द्र बना रहा। ड्योडी पीर की दरगाह के पीर गुलाम शब्बर ने बताया कि इस ताजिया को बनाने में चार माह का खासा वक्त लगा। इसकी बनावट को हूबहू मलेशिया की मस्जिद एवं ख्वाजा गरीब नवाज की बारादरी को दर्शान में खासी मेहनत करनी पड़ी।