क्या भारत में दिखाई देगा सूर्य ग्रहण..?
क्या भारत पर पड़ेगा ग्रहण का असर..?
क्या भारत में भी मान्य होगा ग्रहण का सूतक..?
क्या ग्रहण के समय में बाहर निकलना है या नहीं.?
क्या रविवार को करना होगा ग्रहण के नियमों का पालन..?
ऐसे कई सवाल.. इस वक्त कई भारतीयों के मन में है… इस रिपोर्ट में आपको इन्हीं सवालों का जवाब मिलेगा। इसके लिए आपको पूरा वीडियो ध्यान से देखना होगा। 21 सितंबर यानी रविवार को साल का आखिरी सूर्यग्रहण है। भारत में सूर्य ग्रहण का काफी धार्मिक महत्व माना जाता है। रविवार को पितृ विसर्जनी अमावस्या के दिन साल का आखिरी सूर्य ग्रहण लग रहा है। आश्विन मास कृष्ण पक्ष की अमावस्या को लगने वाला सूर्य ग्रहण कन्या राशि और उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में लगेगा। ऐसे में देशभर में कई लोगों के मन में ये सवाल है कि क्या हम पर इस ग्रहण का असर होगा..?
इसके जवाब से पहले आपको बता दें कि सूर्य ग्रहण कब लगेगा.? साल का अंतिम सूर्य ग्रहण 21 सितंबर को रात में 10 बजकर 59 मिनट पर शुरू होगा.. जो तड़के 3 बजकर 23 मिनट तक चलेगा। यानी लगभग साढ़े चार घंटे तक ग्रहणकाल रहेगा। शास्त्रों के अनुसार, सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या के दिन लगता है, जबकि चंद्र ग्रहण पूर्णिमा को लगता है। सूर्य ग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले ही शुरू हो जाता है। ऐसे में सुबह 11 बजे सूतक शुरू हो जाएगा। लेकिन सबसे राहत की बात ये है कि ये सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इस वजह से ग्रहण का सूतककाल भी नहीं लगेगा। ना ही ग्रहण और सूतक काल के नियम लागू होंगे। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक ग्रहण का प्रभाव सभी बारह राशियों पर अलग-अलग पड़ेगा। ये ग्रहण कुछ राशियों के लिए शुभदायी रहेगा जबकि कुछ राशियों पर नकारात्मक असर डालेगा। ज्योतिष के अनुसार यह ग्रहण विशेषकर सिंह और कन्या राशि के जातकों के लिए बेहद लाभकारी रहेगा। इन्हें नौकरी, व्यवसाय और मान-सम्मान में वृद्धि मिलेगी। वहीं अन्य राशियों को भी धीरे-धीरे सकारात्मक परिणाम मिलेंगे।
अब सवाल ये कि भारत में नहीं तो फिर सूर्य ग्रहण कहां कहां दिखाई देगा। इसका जवाब है कि इसे केवल न्यूजीलैंड, अंटार्कटिका, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिणी प्रशांत महासागर और अफ्रीका के कुछ हिस्सों में देखा जा सकेगा। यानी भारत में लोग इस खगोलीय घटना का प्रत्यक्ष अनुभव नहीं कर पाएंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल तभी माना जाता है जब ग्रहण भारत में दिखाई दे। लेकिन 21 सितंबर का यह सूर्य ग्रहण भारत में प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नहीं देगा, बल्कि यह मुख्य रूप से उत्तरी और पश्चिमी देशों में देखा जाएगा। इस कारण भारत में इसका सूतक काल प्रभावी नहीं होगा। इसका अर्थ यह है कि नवरात्रि जैसे धार्मिक कार्य और पूजा-पाठ बिना किसी बाधा के किए जा सकेंगे। यही वजह है कि इस ग्रहण का असर भारत के लिए शुभ संकेतों से भरा माना जा रहा है।