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Bhilwara news साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल: क्यूंकि यह बंधन तो प्यार का बंधन है

रायपुर (भीलवाड़ा)। यह बंधन तो प्यार का बंधन है। रेशम की डोर से सजी राखी के इसी बंधन को मुस्लिम परिवार भी स्नेह की डोर से बांधे हुए साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल कायम किए हुए है। इस मिसाल का साक्षी बना है भीलवाड़ा जिले का रायपुर कस्बा। यहां मुस्लिम परिवार रेशमी धागे में अभ्रक की […]

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रायपुर (भीलवाड़ा)। यह बंधन तो प्यार का बंधन है। रेशम की डोर से सजी राखी के इसी बंधन को मुस्लिम परिवार भी स्नेह की डोर से बांधे हुए साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल कायम किए हुए है। इस मिसाल का साक्षी बना है भीलवाड़ा जिले का रायपुर कस्बा।

यहां मुस्लिम परिवार रेशमी धागे में अभ्रक की राखी बना रहे है। यह परिवार तहसील क्षेत्र के अनेक गांव में घर-घर राखी पहुंचाने का काम करता है। रक्षाबंधन से एक माह पूर्व परिवार जुटता है। रेशमी धागा भीलवाड़ा से मंगवाते हैं, अभ्रक के बड़े-बड़े टुकड़े मांडल तहसील क्षेत्र में स्थित खदानों से लाया जाता।

60 वर्षीय रायपुर निवासी मुस्ताक बख्श बिसायती ने बताया कि उनके दादा जमाल बख्श व पिता करीम बख्श राखी बनाने का काम वर्षों से करते आए हैं। उनके निधन के बाद आज तक इस परंपरा का परिजन निर्वहन कर रहे हैं। अभ्रक और रेशमी धागे से बनाई जाने वाली राखी रक्षाबंधन से एक महीने पहले बनाने में पूरा परिवार जुट जाता है। रेशमी धागा भीलवाड़ा से मंगवाते हैं वहीं अभ्रक के बड़े-बड़े टुकड़े मांडल तहसील क्षेत्र में स्थित खदानों से लाते हैं।

राखियाें के बदले ग्रामीण देते हैं अनाज

हजारों की संख्या में राखियां तैयार होने के बाद श्रावण मास की पंचमी के दिन से पूरे क्षेत्र में परिवार के सदस्य घर-घर जाकर 10 से 20 राखियां देते हैं। इन के बदले अनाज दिया जाता है। इसे लेकर मुस्ताक का कहना है कि जिनके घर में हम जाते हैं हमको पूरा आतिथ्य सत्कार मिलता है। इससे हमें सुकून मिलता है।

भगवान को समर्पित की जाती है पहली राखी

गांव में परिवार के लोग इस अभ्रक की बनाई राखी को सर्वप्रथम भगवान को अर्पित करता है। उसके बाद बहन भाई के अभ्रक से बने रक्षा सूत्र को बांधकर इस त्योहार को मानते हैं। पशुधन के अलावा खेतों में बोई फसल पर भी यह रक्षा सूत्र बांधते हैं। 

परिवार के मुखिया मुस्ताक बक्स ने कहा कि यह परंपरा जो हमारे बड़े बुजुर्गों ने शुरू की थी वह निरंतर जारी रखने के लिए हम हमारे परिजनों को यही प्रेरणा देते हैं कि हमारी गैर मौजूदगी में इस परंपरा का निर्वहन करते रहना। जिससे सांप्रदायिक एकता व भाईचारा बना रहे।