भीलवाड़ा। राजस्थान में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल के आखिरी में 19 नए जिले बना निए, लेकिन इनमें से अब आधा दर्जन जिलों के लोगों को एसपी से मिलने के लिए भटकना पड़ता है, दूसरे जिलों के एसपी को इन नए जिलों के लिए अधीक्षक पद का अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। गौर करने वाली बात यह है कि भीलवाड़ा एसपी धर्मेन्द्र सिंह यादव के पास नए बनाए गए शाहपुरा जिले के पुलिस अधीक्षक का अतिरिक्त चार्ज भी है, लेकिन यह दोनों ही जिलें अलग-अलग रेंज में आते है, शाहपुरा जिला अजमेर रेंज आईजी व भीलवाड़ा जिला उदयपुर रेंज आईजी के अंर्तगत आता है, इससे इन दोनों जिले के एक ही एसपी को संबंधितरेेज मुख्यालय जाने के लिए लंबी भागदौड़ करनी पड़ती, इससे थाना पुलिस पर एसपी की निगरानी कमजोर रहती है।
प्रदेश में पूर्ववर्ती गहलोत सरकार के कार्यकाल के दौरान गठित 19 नए जिलों में छोटे स्तर के जिलों को समाप्त करने के लिए भजन लाल शर्मा मशक्कत कर रही है। इसके लिए राज्य सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति भी गठित कर रखी है। यह समिति नवगठित जिलों की समीक्षा कर रही है। माना जा रहा है कि सरकार उपचुनाव के बाद छोटे जिलों को समाप्त करने के संदर्भ में बड़ा निर्णय कर सकती है।
राज्य सरकार के आदेशानुसार शाहपुरा जिले के एसपी की कमान भीलवाड़ा एसपी धर्मेन्द्र सिंह को सौंपी गई है। शाहपुरा जिला, भीलवाड़ा से ही टूट कर नया जिला बना है। इसी प्रकार केकडी का अजमेर, गंगापुर सिटी का सवाईमाधोपुर, दूदू का जयपुर ग्रामीण व सांचौर का जिम्मा जिला पुलिस अधीक्षक पाली का प्रभार दिया गया है।
यहां बड़ी बाते यह है भीलवाड़ा की रेंज उदयपुर है तो शाहपुरा की रेंज अजमेर है। हालांकि नए जिलों व संभाग के गठन से पहले भीलवाड़ा भी अजमेर संभाग का हिस्सा था, लेकिन बाद में उदयपुर संभाग की सीमा में आ गया। पांच जिलों में लगे नए एसपी के मामले भी संभवत: भीलवाड़ा-शाहपुरा जिले ऐसे है, जो कि दोनों अलग-अलग रेंज में आते है, जबकि चार अन्य जिले व उनसे जुड़े एसपी की रेंज एक ही है।
भीलवाड़ा जिला प्रदेश के अति संवेदनशील जिलों में माना जाता है। जिले में लगातार सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की घटना हो रही है। गत गुरुवार रात शहर में चाकूबाजी की घटना के बाद मंगला चौक में पथराव, मारपीट व वाहनों में आगजनी की घटना हो गई थी। अगस्त में भी शहर में गाय की कटी पूंछ मंदिर परिसर में मिलने से भीलवाड़ा शहर दो दिन तक तनाव में उबला था। बढ़ती घटनाओं से भीलवाड़ा जिला पुलिस अधीक्षक पर जिला मुख्यालय को नहीं छोड़ने का दबाव बढ़ जाता है। तबादलों की गणित से एएसपी व डिप्टी भी शहर में हाल ही नए आए है।
भीलवाड़ा पुलिस अधीक्षक को क्राइम बैठक व प्रशासनिक कार्य के लिए उदयपुर व अजमेर मुख्यालय जाना पड़ता है, दोनों ही रेंज मुख्यालय में विपरीत दिशा में है। इसी प्रकार भीलवाड़ा के साथ ही शाहपुरा को भी शांति एवं कानून व्यवस्था तथा अपराध नियंत्रण की दृष्टि से संभालने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है।
भीलवाड़ा-शाहपुरा जिले के पुलिस अधीक्षक धर्मेन्द्र सिंह यादव बताते है कि शाहपुरा जिला, पहले भीलवाड़ा जिले का ही हिस्सा था, ऐसे में दिक्कत नहीं आती है, दोनों जिले का सुपरविजन संबंधित अधिकारियों से कोर्डिेशन होने से बेहतर हो रहा है। दोनों जिलों की अच्छी मॉनेटेरिंग की पूरी कोशिश है। दोनों रेंज मुख्यालय पर आवश्यक कार्य से आना जाना होता है।