भीलवाड़ा। व्हाट्स पर आए कॉल पर व्यक्ति पुलिस अधिकारी की वर्दी में नजर आए तो घबराए नहीं, सजग एवं सतर्क हो जाए। उसकी बात के झांसे में ना आए, वह आप के परिवार के किसी भी सदस्य के किसी भी प्रकार के मामले में फंसे होने एवं उसकी गिरफ्तारी की बात कह कर डरा व धमका सकता है।
जरूरत ऐसे कॉल एडेंट नहीं करने की है, गलती से हो जाए तो पूरी सावधानी बरते। साइबर क्राइम के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए राजस्थान पत्रिका के रक्षा कवच अभियान के तहत शुक्रवार को जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर में आयोजित टॉक शो में न्यायिक कर्मियों ने यह बात कही।
संवाद के दौरान न्यायिक कर्मचारी संघ के पूर्व जिलाध्यक्ष कृष्ण गोपाल तोलम्बिया, जिलाध्यक्ष दिलबहादुर सिंह चारण व एडीजे वन के वरिष्ठ निजी सहायक रतन लाल टेलर ने कहा कि साइबर अपराधी बच्चों, महिलाए व बुजुर्गों को सर्वाधिक रूप से निशाना बना रहे है। जरूरी है कि परिजनों को साइबर अपराधियों के बारे में बताया जाए। उन्हें बताए कि किस प्रकार अपराधी उधारी चुकाने, शेयर बाजार में निवेश करने एवं लोन लेने के मैसेज या कॉल के जरिए झांसे दे रहा है और बड़ी नगदी बैंक खातों से उड़ा रहे है।
संवाद में कुंज बिहारी शर्मा ने कहा कि कॉल के दौरान कोई पुलिस या आयकर अधिकारी होने की धौंस दिखाए और गिरफ्तार करने की बात कहे तो घबराए नहीं और कॉल को तुरंत काट कर सत्यापन करे। गोपाल सिंह सोलंकी ने कहा कि कॉल आने पर तुरंत निर्णय नहीं लेंवे, जयंत ने कहा कि ओटीपी किसी से सांझा नहीं करे। गजेन्द्र सिंह ने कहा अनजान लोगों से लेन देन नहीं करे।
न्यायिक कर्मी सोनाली जैन ने सलाह दी है कि अनजान लिंक पर क्लिक नहीं और ना ही ओटीपी किसी को देंवे। किसी से अनजान से लंबी बात भी नहीं करे। ललिता मंडावरिया ने कहाकि परिवार के सभी सदस्यों को भी जागरूक किया जाए। बैंक खाते को सुरक्षित रखने के लिए पासवर्ड मजबूत बनाना चाहिए। मुकेश छीपा ने कहाकि घर के छोटे बच्चों को घर का मोबाइल देने से बचे, प्रयास यह हो कि मोबाइल वह देंवे, जिसमें ऑनलाइन लेन देन नहीं होता है।