
कोटा. मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व में गुरुवार को बाघ नजर आ गया। इसके बाद वन विभाग ने राहत की सांस ली। टाइगर रिजर्व में मंगलवार से बाघ एमटी-5 के सिग्नल नहीं मिल रहे थे। इस कारण विभाग की चिंता बढ़ गई थी। बुधवार से विभाग की अलग-अलग टीमें बाघ की तलाश में लगी हुई थी।दिनभर की सर्चिंग के बावजूद बाघ की लोकेशन का पता नहीं चल सका था। विभाग को गुरुवार दोपहर बाघ की मौजूदगी के संकेत मिले। इसके बाद बाघ की डायरेक्ट साइटिंग भी हो गई।
कोलीपुरा रेंज में मिले थे सिग्नल
सहायक वन संरक्षक जनक सिंह ने बताया कि मंगलवार को कोलीपुरा रेंज में बाघ की लोकेशन के सिग्नल मिले थे, लेकिन इसके बाद सिग्नल नहीं मिले। इस पर चार अलग-अलग टीमें बनाकर बाघ को तलाश किया गया। अब वह मिल गया है। उन्होंने बताया कि बारिश में पगमार्क इत्यादि नहीं मिल पाते, कई बार बाघ ऐसे स्थान पर जाकर बैठ जाता है, जहां से सिग्नल भी नहीं मिलते। टीम बाघ की निगरानी कर रही है।
घुमक्कड़ है और अच्छा तैराक भी
यह पहला अवसर नहीं है जब बाघ एमटी-5 ने वन विभाग की टीम को छकाया है। इससे पहले भी टीम को बाघ को तलाश करना पड़ा था। बाघ मुकुन्दरा से दूर चला गया था, कुछ दिन घूमकर लौटा था। इसी तरह गत वर्ष 28 अक्टूबर को भी बाघ के रेडियो कॉलर जीपीएस फिक्सेज आना बंद हो गए थे। सप्ताहभर की लुकाछिपी के बाद चंबल नदी क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी का पता चला था। बाघ चंबल को भी पार कर चुका है।
इसलिए टेंशन ज्यादा
मुकुन्दरा रिजर्व का एक बाघ व एक शावक पूर्व में लापता हो चुके हैं। टाइगर रिजर्व बनने के बाद रामगढ़ से लाकर मुकुन्दरा में छोड़ा गया पहला बाघ एमटी-1 वर्ष 2020 में बाघिन एमटी-2 की मौत के कुछ दिन बाद लापता हो गया था। बाद में एक शावक का भी पता नहीं चला था।
टाइगर रिजर्व में बाघ की एक जोड़ी
मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व में वर्तमान में दो ही बाघ हैं। इनमें एक बाघ व एक बाघिन है। पहले टाइगर रिजर्व में बाघ- बाघिनों के दो जोड़े थे, व उनके शावक भी हो गए थे, लेकिन वर्ष-2020 के बाद से दो ही बाघ हैं।