– झांसी के मेडिकल कॉलेज में हादसे के बाद पत्रिका ने की अस्पतालों के एनआइसीयू की पड़ताल
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इंदौर. झांसी में मेडिकल कॉलेज में बच्चों की यूनिट में आग की घटना में बच्चों की मौत के बाद भी इंदौर के सरकारी अस्पतालों के एनएसआइयू पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो सके हैं। स्वास्थ्य विभाग के अस्पतालों में नवजात गहन चिकित्सा इकाई ( एनआइसीयू ) सिर्फ पीसी सेठी अस्पताल में है, जहां स्थाई इलेक्ट्रिशियन नहीं है। आवश्यकता होने पर बाहर से निजी इलेक्ट्रिशियन को बुलाया जाता है। एमवायएच के न्यू चेस्ट वार्ड में तो एक बेड पर दो बच्चों का इलाज किया जा रहा है।
पीसी सेठी अस्पताल में 30 बिस्तरों का एनआइसीयू व पीआइसीयू है। फरवरी 2024 में पूरे अस्पताल का ऑडिट कराया गया था। अब फिर से एक सप्ताह में असिस्टमेंट होने वाला है। बिजली बेकअप के लिए डीजी सेट व्यवस्था है। बिजली संबंधित परेशानी के लिए न कोई विंग है और ना ही निजी इलेक्ट्रिशियन को लेकर अनुबंध है। जिला अस्पताल से स्टॉफ को पदस्थ किया था, लेकिन बाद में उसे भी वापस बुला लिया गया।
पूरे शहर के अस्पतालों से रेफर होते हैं मरीज
जिला अस्पताल सहित, पीसी सेठी, मल्हारगंज, बाणगंगा, मांगीलाल चूरिया अस्पताल से प्रसव के बाद गंभीर स्थिति होने पर पीसी सेठी अस्पताल या एमटीएच में बच्चों को रेफर किया जाता है। ऐसे में करीब एक साल से इस तरह की लापरवाही विभाग कर रहा है।
कोटपीसी सेठी अस्पताल में स्थाई इलेक्ट्रिशियन की व्यवस्था नहीं है, लेकिन सभी ऑडिट समय-समय पर होता है। बाहर से हमने इलेक्ट्रिशियन से बात कर रखी है। पूरे अस्पताल में विद्युत संबंधित कोई भी कार्य होने पर तुरंत ही बुला लिया जाता है। यूनिट पूरे मापदंड के अनुसार बनी है।
– डॉ. वीरेंद्र राजगीर, प्रभारी, पीसी सेठी अस्पताल
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एमटीएच अस्पताल : 100 बिस्तरों की चल रही यूनिट
एमटीएच अस्पताल में पीआइसीयू सहित एनआइसीयू के लिए 100 बिस्तरों की व्यवस्था है। तीसरी मंजिल पर बनी यूनिट में कंगारू मदर केयर व्यवस्था भी है। इलेक्ट्रिशियन की एक यूनिट दी गई है। प्रभारी सुमित्रा यादव ने बताया, थर्ड फ्लोर पूरी तरह से बच्चों व मां के लिए ही है। यहां अलग से पूरा स्टॉफ रहता है। समय पर सभी जांच कराई जाती है।
एमवायएच न्यू चेस्ट वार्ड की यूनिट में क्षमता से अधिक बच्चे
एमवायएच के न्यू चेस्ट वार्ड में चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय की यूनिट को फिलहाल शिफ्ट किया गया है। यहां पर 22 बिस्तरों की व्यवस्था है, जिसमें बच्चों का आइसीयू है। इंदौर ही नहीं, अन्य जिलों से रेफरल केस यहां पहुंचते हैं। कई बार एक बिस्तर पर दो बच्चों तक को रखने की स्थिति बनती है। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन अब चाचा नेहरू अस्पताल में भी बेड संख्या बढ़ाने पर विचार कर रहा है।
निजी अस्पतालों में जांच के लिए बनी कमेटी
शहर के निजी अस्पतालों में भी आइसीयू, एसएनसीयू, पीआइसीयू संचालित किए जा रहे हैं। इनकी नियमित जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग की छह सदस्यीय टीम बनाई गई है। इसमें सीएमएचओ, सिविल सर्जन, बीएमओ सहित अन्य अधिकारी शामिल हैं। इन्हें भी अस्पतालों का निरीक्षण कर व्यवस्थाएं बेहतर करने की जिम्मेदारी दी गई है।
2018 में हो चुकी है घटना
एमवायएच में 2018 में एनआइसीयू में आग की घटना सामने आई थी। इसमें नर्सिंग स्टॉफ, डॉक्टर्स व परिजनों ने बच्चों को यूनिट से निकालकर जान बचाई थी। इसके बाद विजय नगर स्थित एक अस्पताल के आइसीयू में भी आग लगी थी। इसमें भी सभी की जान बचाई गई थी।