
भीलवाड़ा। नारी शक्ति देश-दुनिया के विकास की धुरी एवं समाज की ताकत है। इन्हें कमजोर समझने वालों को हर मोर्च पर करारा जवाब मिला है। राजनीति, व्यापार, प्रशासन, खेल जगत में अपनी शक्ति का लोहा मनवा रहीं है। जरूरत आधी दुनिया की शक्ति का सम्मान करने और हौंसला अफजाई की। क्योंकि बेटियां आज किसी से कम नहीं है और प्रत्येक क्षेत्र में अपनी श्रेष्ठता साबित कर रही है। डिजिटल जमाने में बेटियों को सोशल मीडिया के भ्रम जाल से बचना होगा। अपनी सुरक्षा के लिए स्वयं को सावचेत रहना होगा। यह कहना था नारी शक्ति का।
राजस्थान पत्रिका के 70 वें स्थापना दिवस एवं अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर राजस्थान पत्रिका कार्यालय में आयोजित टॉक शो में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी शहर की प्रबृद महिलाओं ने बात रखी। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि अतिरिक्त जिला कलक्टर (शहर) प्रतिभा देवठिया थी। जबकि अध्यक्षता अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (त्वरित अनुसंधान सेल) अदिति चौधरी ने की। इस दौरान नारी शक्ति अनुराधा चौधरी, रीना डाड, कृष्णा राठी, सुमन बनवट, संगीता बाबेल, पुनिता गांधी, चेतना जागेटिया, रजनी सिंघवी, सुमन दुग्गड़, विमला मुणोत, दीपिका पाटनी व समता चौधरी आदि ने भी विचार रखें।
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बेटियों की चमक दिख रही है
बेटियां परिवार की जान एवं घर के लिए अनमोल होती है। बचपन से उसकी भावना के अनुरूप परवरिश करने की जरूरत रहती है। समय रहते बेटियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए। महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए भी सरकार प्रयासरत है। बेटियों की चमक पुलिस व प्रशासनिक क्षेत्र में भी नेतृत्व के रूप में उभरी है।
– प्रतिभा देवठिया, एडीएम सिटी
सुरक्षा के लिए पुलिस व कानून साथ
बेटियां किसी से कम नहीं होती। उन्हें अपनी आंतरिक ताकत को पहचाना होगा। उनकी सुरक्षा के लिए सरकार ने कई कानून बना रखे हैं। महिला पुलिस थाना व महिला हेल्प डेस्क भी है। थानों व विभागों में भी अब महिला कार्मिकों का प्रतिनिधित्व बढ़ा है। साइबर क्राइम से भी उन्हें सावधान रहना होगा।
– अदिति चौधरी, एएसप
बदला जमाने का नजरिया
जमाने का नजरिया बदला है। बेटियां इस कदर आगे बढ़ गई है कि वह किसी के लिए अब बोझ नहीं रही। बेटियों के जन्म पर अब जश्न मनाया जाता है। समाज में बेटियों के लिए जो बदलाव आया है, वह निश्चित रूप से हम सब के लिए गौरव की बात है।
– डॉ. शीतल अजमेरा, नेत्र चिकित्सक
बेटियां बेटों से नहीं कम
बेटियां आज समाज में बेटों के साथ कदम कदम से मिला कर चल रही है। शिक्षा के क्षेत्र में बेटियों ने अपना नाम साबित किया है। शैक्षणिक संस्थानों व कोचिंग सेंटर क्षेत्र के आसपास छात्राओं व महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुलिस व प्रशासन को कहीं अधिक गंभीर होना होगा।
– उर्मिला जोशी, प्रिंसिपल
बेटियों में फर्क करना छोड़ना होगा
बच्चों के बेहतर परवरिश के लिए अभिभावकों को जागरूक रहना होगा। उन्हें बेटे-बेटियों में फर्क करना छोड़ना होगा। बेटियों को बराबर का दर्जा देते हुए आगे बढ़ाना होगा। महिलाओं को सशक्त होने के लिए अपना आत्म विश्वास कहीं अधिक मजबूत करना होगा।
– दीपा सिसोदिया, समाजसेवी
नारी दुनियां की राजस्थान पत्रिका बना ताकत
आधी दुनिया की ताकत को मजबूत करने के लिए राजस्थान पत्रिका अपनी जिम्मेदारी निभाता आया है। महिला उत्पीडन के खिलाफ सदैव आवाज उठाई है, बेटियों का बचपन बढ़ाया है। अब साइबर सुरक्षा के लिए नारी शक्ति का सुरक्षा कवच बना है।
– हंसा व्यास, एंकर
खेल, विज्ञान, शिक्षा, राजनीति में अग्रणी
बेटियां आज दुनिया में नाम रोशन कर रही है। हर क्षेत्र में महिलाएं अग्रणी है। खेल, विज्ञान, शिक्षा, राजनीति में अपनी ताकत साबित की है। बेटियों को जिस प्रकार से घर में ही आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने की जो भावना उभरी है, वह अच्छे संकेत है। साइबर क्राइम से बचने की जरूरत है।
– आरू नामा, छात्रा
सरकारी सेवा में कर रही नेतृत्व
देश की महिलाओं को मौका देने की जरूरत है। मौका मिला तो कई महिलाओं ने अपने दम पर पहचान बनाई है। सेना, पुलिस, खेल, शिक्षा, राजनीति, विज्ञान, सरकारी सेवा में उनका नेतृत्व देखने को मिल रहा है। महिलाओं को उनके हक व अधिकार की जानकारी होनी जरूरी है।
– दिव्या बोरदिया, समाज सेवी
परिजन घर से बाहर भेजने से डरते हैं
बेटियों के साथ होने वाली आपराधिक वारदातों के चलते माता-पिता बेटियों को घर से बाहर भेजने से डरते हैं। इससे बहुत सी प्रतिभाशाली बेटियों की प्रतिभा दबकर रह जाती हैं। समय से पहले उनकी शादी कर दी जाती है। इसलिए बेटियों को मान सम्मान व सुरक्षा मिले। इसका प्रयास होना चाहिए।
– अपर्णा सामसुखा, शिक्षाविद्