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VIDEO : पेयजल के लिए पालीवासियों ने किया ऐसा
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VIDEO : पेयजल के लिए पालीवासियों ने किया ऐसा

-सेवा और संकल्प महासमिति राजस्थान की ओर से रखा गया बंद- कलक्ट्रेट के बाहर किया धरना-प्रदर्शन

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पाली

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Suresh Hemnani

Sep 19, 2022

पाली। इस वर्ष भयंकर जल संकट का सामना कर चुके पालीवासियों ने जवाई बांध में पेयजल के लिए पर्याप्त पानी आरक्षित रखने के लिए सोमवार को आवाज बुलंद की। पाली के व्यापारियों ने सेवा और संकल्प महासमिति के आह्वान पर अपनी इच्छा से प्रतिष्ठान बंद रखे। कलक्ट्रेट के बाहर धरना प्रदर्शन किया। लोगों का कहना था कि इस बार जवाई बांध में पर्याप्त पानी की आवक हुई है। ऐसे में अगली बरसात तक पेयजल की किल्लत नहीं हो। इसके लिए जवाई बांध में जनसंख्या के अनुसार पानी आरक्षित रखने के बाद ही अन्य उपयोग में दिया जाए। शहरवासियों ने मुख्यमंत्री के नाम जिला कलक्टर नमित मेहता को ज्ञापन साैंपा।

बोले: गलत फैसले से आया था संकट
समिति अध्यक्ष जब्बरसिंह राजपुरोहित ने कहा 7 अक्टूबर 2020 को तत्कालीन सम्भागीय आयुक्त समित शर्मा ने जवाई बांध जल वितरण की बैठक में एक तरफा गलत फैसला किया था। जिससे पीने के पानी का संकट खड़ा हुआ। जिला कलक्टर एवं जलदाय विभाग की ओर से 3500 एमसीएफटी पानी की मांग के बदले उस समय मात्र 2192.31 एमसीएफटी पानी ही पेयजल के लिए आरक्षित किया गया था। जबकि सिंचाई के लिए अधिक पानी दिया गया। इसी कारण पानी के लिए वाटर ट्रेन तक चलानी पड़ी। जोधपुर से रोहट, पाली तक पाइप लाइन आज भी नहीं बिछाई जा सकी है। ऐसे में इस बार पेयजल के लिए पर्याप्त पानी आरक्षित करना जरूरी है।

आंकड़ों का बताया गणित
कलक्ट्रेट के बाहर धरना स्थल पर अध्यक्ष राजपुरोहित ने जवाई में उपलब्ध पानी, जवाई बांध से पेयजल योजना के तहत जुड़े गांवों व जिले की जनसंख्या का गणित बताते हुए कहा कि पूरे वर्ष में पेयजल के लिए 4200 एमसीएफटी पानी आरक्षित किया जाना चाहिए। इसके बाद जो पानी है, वह सिंचाई के लिए दिया जा सकता है। उनका कहना था कि वर्ष 1961 में मात्र 100 एमसीएफटी पानी सिंचाई के लिए दिया था। जिसे अब बढ़ा दिया गया है।

करवाई जानी चाहिए जांच
राजपुरोहित ने कहा कि जवाई बांध नहर से सिंचाई के लिए दिए जाने वाले पानी में से काफी व्यर्थ होता है। जवाई कमाण्ड क्षेत्र के बड़े क्षेत्र में भू-जल है। उसकी जांच होनी चाहिए। जवाई बांध से भविष्य में जैसे-जैसे गांव, ढाणियों को पेयजल योजना से जोड़ा जाता है, उसी अनुपात में पीने का पानी तय किया जाना चाहिए। राजपुरोहित ने सिंचाई के गलत आंकड़े प्रस्तुत कर पानी देने का आरोप लगाया। उन्होंने राज्य सरकार, सम्भागीय आयुक्त के साथ पाली एवं जालोर जिला कलक्टर से राजस्व विभाग के माध्यम से सुमेरपुर के 33 व आहोर के 24 गांवों की सिंचित भूमि की पैमाईश करवाकर सिवाय चक सरकारी भूमि को मुक्त कर पानी का अपव्यय राकने की मांग की।

बैठक में बुलाने का आग्रह
अध्यक्ष राजपुरोहित व शहरवासियों का कहना था कि किसानों की तरह वे भी पानी के उपभोक्ता है। ऐसे में जल वितरण समिति की बैठक में किसानों व संगम अध्यक्षों की तरह सेवा और संकल्प महासमिति जल ही जीवन के प्रतिनिधि को भी बैठक में सिंचाई विभाग की ओर से आमंत्रित किया जाना चाहिए।

ज्ञापन में ये मांगे की
-जवाई बांध जल वितरण की बैठक सुमेरपुर के बजाय पाली मुख्यालय या जोधपुर में रखी जाए।
-पाली जिले में पेयजल का मुख्य स्रोत जवाई बांध ही बना रहे। अन्य विकल्प स्वीकार नहीं।
-जवाई बांध का निर्माण पेयजल के लिए ही हुआ था, जिसका प्रमाण जवाई से पाली-जोधपुर जवाई नहर है। इसलिए जवाई बांध को पेयजल के लिए रिजर्व किया जाए।
-पाली शहर व गांवों में इसी माह से 24 घंटे पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
-जवाई बांध कमाण्ड क्षेत्र की सिंचित भूमि स्थित कुओं का सर्वे करवाया जाए।
-कमाण्ड क्षेत्र में जिन किसानों के कुएं है, उनको जवाई बांध नहरी सिचाई योजना से पृथक किया जाए।
-कमाण्ड क्षेत्र को फव्वारा पद्धति की सिंचाई योजना से जोड़ा जाए।
-पाली जिले के शेष बचे गांव-ढाणियों को जवाई बांध पेयजल से जोड़ने के लिए तकमीना बनाया जाए।
-जवाई कमाण्ड जल संगम वितरण समिति में शामिल सांसद, विधायकों को समिति से बाहर किया जाए।
-जल संगम समितियों के चुनाव लम्बे समय से नहीं हुए है। चुनाव करवाकर भूमि की जांच कराई जाए।
-सिंचाई विभाग की जल वितरण के प्रस्तुत आंकड़ों की जांच की जाए।
-एससी/एसटी की सिंचित भूमि पर कब्जों की जांच करवाई जाए।
-किसान संघर्ष समिति सरकार की ओर से बनाई गई है या किसी व्यक्ति की ओर से इसकी जांच कराई जाए।

ये रहे मौजूद
धरना-प्रदर्शन में नगर परिषद के पूर्व सभापति मांगीलाल गांधी, डॉ. पोपट पटेल, सीताराम टांक, पारस भाटी अंजाना, देवराज शर्मा, रतनप्रकाश इचरसा, मोहन छापोला, गोवर्धन प्रजापत, बाबूलाल दय्या, मुरली मनोहर बोड़ा, हीरालाल व्यास, लहर कंवर राठौड़, अरुण जैन, एलपीआर मेहता, मोहसीन खत्री, शहजाद शेख, गुलाम मुस्तफा, भैरूसिंह गुर्जर, फारुख भाई, गोविंदभाई, राणाराम भाट, मेहर बारिया सहित बडी संख्या में शहरवासी मौजूद रहे। धरने में महिलाएं भी शामिल हुई।

बाजार में पसरा रहा सन्नाटा
बंद के कारण शहर के बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। शहर के सूरजपोल चौराहा, धोला चौतरा, सोमनाथ मंदिर मार्ग, घी का झंडा, बाइसी बाजार, सर्राफा बाजार, गोल निम्बड़ा, पुराना बस स्टैंड, बादशाह का झंडा, बांगड़ कॉलेज रोड, रेलवे स्टेशन मार्ग, मिल गेट, पुराना हाउसिंग बोर्ड, मस्तान बाबा मार्ग, नया बस स्टैंड आदि ने प्रतिष्ठान बंद रहे।