
पाली। हर कोई बेटों और बेटियों को पढ़ाने की बात करता है, लेकिन पढ़ाने का जज्बा देखना हो तो पाली शहर से सटी सिधियों की ढाणी में चले जाइए। यहां शिक्षा विभाग व सरकार ने जो स्कूल वर्षों पहले कम नामांकन का कहकर बंद कर दिया था। उसे क्षेत्रवासियों के जज्बे व बच्चों को पढ़ाने के जुनून के कारण शिक्षा विभाग को फिर शुरू करना पड़ा। आज इस स्कूल में 63 बच्चे पढ़ रहे हैं। यह सब ग्रामीणों के अथक प्रयासों से ही संभव हो पाया।
दरअसल, सिंधियों की ढाणी स्थित प्राथमिक विद्यालय को करीब पांच साल पहले कम नामांकन बताकर बंद कर दिया गया था। पहली से पांचवीं तक के कई बच्चों को ढाणी से पांच किलोमीटर दूर शहर के हाउसिंग बोर्ड स्थित स्कूल आकर पढऩा पड़ रहा था। बच्चों को शिक्षा से वंचित देखकर वहां के नागरिकों ने जिला शिक्षा अधिकारी से लेकर बीकानेर जाकर निदेशक तक से गुहार लगाई। इसी का परिणाम है कि तीन माह पहले शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल शुरू करने के आदेश किए गए। स्कूल खुलने के बाद अब बच्चों को पांच किलोमीटर दूर नहीं जाना पड़ता है। इससे अभिभावक भी राहत में है।
तिरंगा के रंग में रंगा स्कूल
अगस्त में इस स्कूल को शुरू करने के आदेश करने से पहले ही ढाणी निवासियों ने यहां बच्चों के लिए निजी स्कूल के समान व्यवस्था करनी शुरू कर दी थी। ढाणीवासियों ने चंदा एकत्रित करके और भामाशाहों से सहयोग लेकर स्कूल को तिरंगे के रंग में रंगवाया। विद्यार्थियों के पीने के पानी के लिए टांका खुदवाया और पोषाहार पकाने के लिए रसोई घर का निर्माण करवाया।
पांचवीं में नहीं हुआ प्रवेश
इस शैक्षिक सत्र में कक्षा पांचवीं में एक भी प्रवेश नहीं हो सका। इसका कारण बच्चे नहीं होने के बजाय यह रहा कि पांचवीं कक्षा की परीक्षा के आवेदन स्कूल शुरू होने से पहले ही भरे जा चुके थे। ऐसे में ढाणी के बच्चों को अभी तक हाउसिंग बोर्ड ही पढऩे आना पड़ रहा है।
इतने विद्यार्थी है स्कूल में
कक्षा पहली : 39
कक्षा दूसरी : 12
कक्षा तीसरी : 08
कक्षा चौथी : 4
संघर्ष किया तो खुल पाया स्कूल
ढाणी में स्कूल बंद करने के कारण कई बच्चे शिक्षा से वंचित हो गए थे। हमने जिला शिक्षा अधिकारी व इसके बाद निदेशक को बीकानेर जाकर स्कूल शुरू कराने को कहा। उनके मापदण्ड से अधिक बच्चों का प्रवेश दिलाने व भवन को तैयार करने का वादा कर उसे भामाशाहों के सहयोग से पूरा किया। -नूरुद्दीन, क्षेत्रवासी
ढाणीवासियों ने किए प्रयास
ढाणी में स्कूल खुलवाने के ढाणीवासियों ने बेहतर प्रयास किए। वहां के बच्चों को पहले रेलवे क्रॉसिंग पार कर पढऩे के लिए आना पड़ रहा था। स्कूल खोलने के आदेश होने पर हमने वहां प्रतिनियुक्ति पर दो शिक्षकों की नियुक्ति कर दी है। ढाणीवासी शिक्षा को लेकर जागरूक है। -दिलीप कर्मचंदानी, अति. जिला शिक्षा अधिकारी, प्रारम्भिक, पाली