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फसल समेटने का कार्य अंतिम चरण में, अब रबी बुवाई की तैयारी

प्रतापगढ़. जिले में इस वर्ष प्राकृतिक प्रकोप के कारण खरीफ की फसल काफी खराब हो गई है। वहीं बारिश भी औसत से अधिक हुई है। ऐसे में अब किसानों को रबी की फसल से आस है। किसान रबी की तैयारी में जुट गए है।गौरतलब है कि जिले में खरीफ की फसल की कटाई और थ्रेसरिंग […]

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प्रतापगढ़. जिले में इस वर्ष प्राकृतिक प्रकोप के कारण खरीफ की फसल काफी खराब हो गई है। वहीं बारिश भी औसत से अधिक हुई है। ऐसे में अब किसानों को रबी की फसल से आस है। किसान रबी की तैयारी में जुट गए है।
गौरतलब है कि जिले में खरीफ की फसल की कटाई और थ्रेसरिंग का कार्य अंतिम चरण में है। इसके तहत किसान अपने खेतों में फसल की कटाई का कार्य पूर्ण हो गया है। इसके साथ ही रबी की बुवाई का कार्य भी शुरू हो गया है। अधिकांश खेतों में अभी खरीफ फसल की कटाई और थ्रेसरिंग का कार्य धड़ल्ले से चल रहा है। इस बार गत दिनों से बारिश होने से काफी बिगाड़ा भी हो रहा है। बारिश के कारण जहां किसानों को खरीफ की फसल समेटने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। वहीं दूसरी ओर बारिश होने से खेतों में नमी है। ऐसे में आगामी रबी की सीजन में बुवाई का रकबा बढ़ेगा। इस आधार पर कृषि विभाग भी तैयारियों में जुट गया है।
गौरतलब है कि जिले में इस वर्ष खरीफ की बुवाई का लक्ष्य एक लाख ८४ हजार हैक्टेयर में की गई थी। जिसमें सोयाबीन की बुवाई एक लाख २९ हजार हैक्टेयर में हुई। इसमें अगेती फसल की कटाई और थ्रेसरिंग हो चुकी है। अधिकाशं खेत खाली हो गए है। वहीं नमी पर्याप्त है। ऐसे में रबी की फसल बुवाई के लिए किसान तैयारी भी कर रहा है। ऐसे में किसान भी खेतों में ही व्यस्त है। मजदूर वर्ग भी अभी खेतों में काम करने में जुटे हुए है।
यह रहा था गत वर्ष का रकबा
जिले में गत वर्ष रबी की रकबा एक लाख २४ हजार हैक्टेयर में था। जिसमें गेहूं की बुवाई ७० हजार हैक्टेयर, चना की ५१ हजार, मसूर की ६ हजार, सरसा १० हजार हैक्टेयर में की गई थी। इस वर्ष खेतों में अभी नमी पर्याप्त मात्रा में है। ऐसे में चना और मसूर का रकबा बढऩे की उम्मीद है। ऐसे में विभाग भी तैयारी करने में जुटा हुआ है।

बढ़ेगा रबी में रकबा, कर रहे तैयारी
इस वर्ष बारिश का दौर देर तक चला है। इससे खेतों में नमी काफी अधिक है। ऐसे में रबी की फसलों की बुवाई का क्षेत्र बढऩे की काफी संभावना है। इसे देखते हुए हम तैयारी कर रहे है। उन्नत बीजों का वितरण भी शुरू करवा दिया है। उर्वरक की भी पूरी व्यवस्था के लिए विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया गया है। काफी मात्रा में आपूर्ति हो गई है।
बंशीधर मीणा, संयुक्त निदेशक, कृषि विस्तार, प्रतापगढ़