इलाहाबाद. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कुशीनगर में औद्योगिक क्षेत्र की भूमि को व्यावसायिक भूमि में परिवर्तित करने के लिए याची से दो करोड़ 47 लाख जमा कराने के बाद अतिरिक्त राशि न देने पर कार्रवाई के खिलाफ याचिका पर उ.प्र राज्य औद्योगिक विकास निगम (यूपीएसआईडीसी) व राज्य सरकार से जवाब मांगा है। याचिका पर अगली सुनवाई 12 अप्रैल को होगी और कोर्ट ने यथास्थिति बनाये रखने का आदेश दिया है।
यह आदेश मुख्य न्यायाधीश डी.बी. भोसले तथा न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की खण्डपीठ ने मेसर्स विक्टोरिया हास्पिटलिटीज लि. कुशीनगर की याचिका पर दिया है।
याची का कहना है कि उसने निगम को भूमि की प्रकष्ति बदलने के लिए दो करोड़ 47 लाख रूपये 2006 में दिये। याची के होटल का नक्शा भी पास हो गया और अब निगम होटल को बंद कर जब्त करने की कार्यवाही करने जा रहा है। इससे पूर्व याची को सुनवाई का मौका भी नहीं दिया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता एम.सी. चतुर्वेदी का कहना है कि भूमि की प्रकष्ति बदलने आदि का क्षेत्राधिकार निगम को नहीं उ.प्र. राज्य विकास प्राधिकरण को है। निगम ने होटल जब्त नहीं किया है। जिस अधिकारी ने याची से पैसा जमा कराया था, उसके खिलाफ जांचकर कार्रवाई की जा रही है।
कोर्ट ने कहा कि जब निगम को याची की भूमि पर अधिकार ही नहीं तो उसने याची के होटल के खिलाफ कैसे कार्रवाई की। निगम या तो ब्याज सहित जमा कराये पैसे याची को वापस करे या फिर सीडा को भेज दे। याची अथारिटी के समक्ष भूमि उपयोग परिवर्तन की अर्जी दे। कोर्ट ने यूपीएसआईडी को एक हफ्ते में हलफनामा दाखिल कर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।
BY- Court Corrospondent