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संविधान का अनुच्छेद 226 व 227 के बारे में जान लीजिये, मूल अधिकार के लिये ये जरूरी है

इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन में संविधान के अनुच्छेद 226 व 227 के बारे में दी गयीं अहम जानकारियां।

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इलाहाबाद. अधिवक्ता परिषद् उत्तर प्रदेश की उच्च न्यायालय इकाई द्वारा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के लाइब्रेरी हॉल में मंगलवार को आयोजित स्वाध्याय मंडल में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 एवं 227 पर गहन चर्चा हुई। स्वाध्याय मंडल में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित हाईकोर्ट के अधिवक्ता प्रतीक राय ने कहा कि मूल अधिकारों एवं विधिक अधिकारों का हनन होने पर पीड़ित व्यक्ति अनुच्छेद 226 के तहत उपचार के लिए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के समक्ष याचिका क्षेत्राधिकार के अन्तर्गत आ सकता है।

उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 227 के अन्तर्गत उच्च न्यायालय को अपने अधीनस्थ न्यायालयों के संबंध में पर्यवेक्षी शक्ति (सुपरवाइजरी पॉवर) उपलब्ध हैं। अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद् के संगठन मंत्री अधिवक्ता सत्य प्रकाश राय, अधिवक्ता परिषद् हाईकोर्ट इकाई के अध्यक्ष अधिवक्ता नरसिंह दीक्षित, अधिवक्ता परिषद् हाईकोर्ट इकाई के महामंत्री अधिवक्ता प्रमोद सिंह आदि ने भी अनुच्छेद 226 एवं 227 पर अपने विचार रखे। स्वाध्याय मंडल में विषय प्रवेश हाईकोर्ट की अधिवक्ता सुश्री प्रज्ञा पाण्डेय ने किया।

स्वाध्याय मंडल का संचालन अधिवक्ता संदीप ने किया। अधिवक्ता परिषद् हाईकोर्ट इकाई के महामंत्री प्रमोद सिंह ने बताया कि अगली श्रंखला 15 फरवरी को होगी। इस मौके पर अधिवक्ता गिरिजेश त्रिपाठी, रामानंद पांडेय, सौरभ शुक्ला, प्रशांत सिंह, अरविन्द गोस्वामी, नन्द लाल मौर्या, राधेश्याम, विवेक सिंह समेत सैकड़ों की संख्या में अधिवक्ता उपस्थित रहे।

by Prasoon Pandey