
आध्यात्मिक गुरु व कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर (Devkinandan Thakur) मंगलवार छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर पहुंचे। देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि दो नज़रिए हैं- एक ऋषि परंपरा और दूसरी आचार्य परंपरा (Acharya Tradition)। हमारे ऋषियों के बहुत सारे शिष्य रहे हैं। तो क्या किसी ऋषि के अपने उत्तराधिकारी नहीं होने चाहिए? हमारे संतों में से कुछ अविवाहित रहते हैं, जबकि कुछ गृहस्थ होते हैं। अगर कोई संत या आध्यात्मिक गुरु (Spiritual Guru) गृहस्थ है, तो क्या उसे अपने बच्चों को किसी बिल्कुल अलग काम में लगा देना चाहिए? अगर मैं यहां से, इतनी सारी मीडिया की मौजूदगी में यह बात कहूं, तो क्या मुझे उन्हें जुआरी बना देना चाहिए? वह संत क्या चाहेगा, और आप अपने बच्चों के लिए क्या चाहेंगे? बता दें कि छत्तीसगढ़ सरकार (Chhattisgarh Government) ने कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर को राजकीय अतिथि का दर्जा दिया है। वे रायपुर (Raipur) के बूढ़ापारा स्थित इंडोर स्टेडियम में 8 से 14 जुलाई तक आयोजित श्रीमद भागवत (Shrimad Bhagwat) कथा ज्ञान यज्ञ के लिए आए हैं।
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