रतलाम. शहर से लेकर अंचल में इन दिनों विकास यात्राओं की धूम है। शासन से लेकर प्रशासन चार साल में किए कार्यों को गिनाकर आत्ममुगध हो रहा है। सब कुछ अच्छा बताया जा रहा है। इसके उलट गांव के हालात घरातल पर अलग है। स्कूलों में समय पर बच्चे पहुंच रहे है, लेकिन शिक्षक ही गायब है। ऐसे में समझा जा सकता है कि पढ़ाई का स्तर किस तरह का होगा।
समय पर बच्चे आए, इंतजार शिक्षक का
शुक्रवार सुबह करीब 10.35 बजे ईसरथुनी स्थित शासकीय माध्यमिक विद्यालय के प्रांगण में बच्चे खेल रहे थे। जब बच्चों से सवाल किया गया स्कूल के ताले क्यों नहीं खुले तो जवाब मिला शिक्षक नहीं आए। कब आते है सवाल पर बताया 11 बजे। हकीकत में स्कूल का समय सुबह 10 बजे शिक्षक के आने के लिए रहता है।
इनमे है पढऩे के लिए लगन
ईसरथुनी माध्यमिक विद्यालय में पढऩे के लिए लगन इतनी की बेटियां अपने गांव से चार किमी चलकर आ रही थी। एक बेटी ने बताया उनके गांव मठरुंडा में प्राथमिक विद्यालय है। ऐसे में आगे की पढ़ाई के लिए ईसरथुनी ही आना होता है। ईसरथुनी से मठरुंडी के बीच कई छात्र – छात्राएं पैदल स्कूल आते हुए नजर आए। इनको अब तक साइकल स्कूल आने के लिए नहीं मिली है।
शिक्षक नहीं, इनकी हो गई मौज
मठरुंडा में प्राध्यमिक विद्यालय में स्कूल के बस्ते एक पेड़ के नीचे पड़े हुए थे। समय सुबह के करीब 10.50 का हो रहा था। यहां बच्चे खेलकुद करते नजर आए। जब बच्चों से सवाल किया शिक्षक कहां है तो बोले नहीं पता। रोज देरी से आते है सवाल करने पर बच्चे चुप हो गए।
पहाड़े पूरे आते, बस शिक्षक नहीं
सामरखो गांव में प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को 10 तक के पहाड़े हिंदी में पूरे याद है। यहां सुबह करीब 11 बजे बाद पहुंचने पर भी स्कूल भवन के ताले नहीं खुले थे। बच्चों से स्कूल के शिक्षक के बारे में जानकारी मांगी गई तो किसी को यह नहीं पता था कि वे कब आएंगे। हालांकि जब बच्चों से गणित से जुड़े 6, 8, 9 का पहाड़ा पूछा गया तो कक्षा 4 के अर्जुन ने पूरा बता दिया।