रीवा. विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम अपने क्षेत्र में जनसंपर्क के दौरान उस समय असहज हो गए जब उनसे ग्रामीणों ने सवाल पूछा लिया और आरोप भी लगाया। गुस्से में आए गौतम ने कहा कि उनका पूरा कामकाज पारदर्शी है, बदनाम करने की साजिश रची जा रही है। यदि उनकी ओर से किए जाने वाले काम में किसी तरह की गड़बड़ी पाई जाएगी तो वह राजनीति छोड़कर पद से इस्तीफा दे देंगे। इस बातचीत का पूरा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
बेटे के लिए प्रचार करने पहुंचे थे
एक दिन पूर्व देवतालाब विधानसभा क्षेत्र के हटवा सोरैहान गांव में जनसंपर्क करने विधानसभा अध्यक्ष पहुंचे थे। उनके पुत्र राहुल गौतम और भतीजे पद्मेश गौतम जिला पंचायत के वार्ड 27 से प्रत्याशी हैं। पुत्र के समर्थन में गौतम वोट मांग रहे थे। इसी दौरान गांव के निवासी पूर्व सैनिक दिनेश पाण्डेय ने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ गरीबों तक नहीं पहुंच पा रहा है। कुछ दलालों के माध्यम से अब चुनाव के समय रुपए बांटे जा रहे हैं। यह भी कहा कि इन दलालों पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं हो रही है। इतना सुनते ही विधानसभा अध्यक्ष गौतम नाराज हो गए और कहा कि उन्होंने जो भी काम कराया है, शासन की योजनाओं का लाभ लोगों को सीधे मिल रहा है। बैंक खाते में सीधे राशि जा रही है। किसी को नकदी या फिर चेक से रुपए नहीं दिए जाते। उन्होंने संबंधित को चैलेंज करते हुए कहा कि एक-एक व्यक्ति का हिसाब है। यदि आरटीजीएस के जरिए खाते में रुपए गए हैं तो इस गांव के सभी वोट हमें चाहिए, एक वोट भी बाहर नहीं जाना चाहिए। यह भी कहा कि यदि खाते में रुपए नहीं गए हैं तो हमारे प्रत्याशी को एक भी वोट नहीं करना। इस संवाद का वीडियो वायरल हो गया है।
विपक्ष ने मढ़े आरोप
विपक्ष आरोप लगा रहा है कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को पंचायत चुनाव में प्रचार नहीं करना चाहिए, इससे पद की गरिमा प्रभावित होती है। विधानसभा अध्यक्ष के घर से ही दो प्रत्याशी आमने-सामने आ गए हैं। इस कारण चुनाव दिलचस्प हो गया है। पुत्र को वोट करने के लिए ग्रामीणों से अपील करने अध्यक्ष पहुंचे थे।
गौतम की सफाई- अपनी बातों पर कायम हूं
वीडियो वायरल होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने सफाई दी। कहा कि वीडियो में जो कुछ कहा जा रहा है वह सच है। क्षेत्र के लोगों से रूटीन मुलाकात के दौरान हटवा सोरैहान गांव में कुछ लोगों ने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है, कुछ चिन्हित लोग इसका फायदा उठा रहे हैं। जिस पर संबंधित को समझाने का प्रयास किया। शासन की योजनाएं हों या फिर स्पीकर-विधायक निधि सबकी राशि खाते में आती है, किसी बिचौलिए के लिए स्थान ही नहीं है।