सागर. कक्षा 9वी तक पढ़ाई करने के बाद मनोज कुशवाह पटेल ने अपने बड़े भाई के साथ भवनों पर पुट्टी का ठेका लेना शुरू किया। कुछ समय बाद वह अकेले ही ठेका लेने लगा लेकिन ज्यादा कमाई न हाथ न आने पर करीब डेढ़ से उसने ठेकेदारी बंद कर दी थी। वह कभी-कभार काम करता और बाकी समय अपने पिता के साथ ठेके पर ली खेती में हाथ बंटाता था। मनोज के सपने ऊंचे थे, वह पत्नी और बच्चों के साथ सुख-साधनों के बीच जीवन जीना चाहता था लेकिन अच्छा काम नहीं मिल रहा था। सपने चूर होने से मनोज अंतर्मुखी हो गया था। वह अकसर सुबह घर से निकलता और शाम को वापस आता। कभी-कभी गांव से कुछ दूर खेत पर पिता को खाना देने भी वह जाता था। बुधवार शाम को भी वह पिता को खाना देकर रात 8 बजे घर लौटा था।
गुरुवार को शहर से सटे बम्होरी रेंगुवा में दो मासूम बच्चियों और महिला की मौत दिनभर शहर में चर्चा का विषय रही। पत्नी और बेटियों के मौत की गोद में सोने के बाद मनोज ने भी फंदे पर झूलकर जान देने की कोशिश की थी लेकिन किस्मत ने उसे बचा लिया। हांलाकि गुरुवार को दिनभर मनोज की हालत नाजुक बनी रही और डॉक्टर उस पर नजर बनाए रहे। उधर अधिकारी भी इस पूरे घटनाक्रम की असल वजह को लेकर गंभीरता के साथ पड़ताल में जुटे हुए हैं। गुरुवार दोपहर एएसपी राजेश व्यास, सीएसपी आरडी भारद्वाज ने भी मुआयना पर परिजन व ग्रामीणों से बात की। वहीं मोतीनगर टीआइ संगीता ङ्क्षसह ने फॉरेंसिक व फिंगर एक्सपर्ट की मदद से साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस आत्महत्या की वजह, मनोज की आर्थिक स्थिति व कामकाज के संबंध में पड़ताल जारी है। मनोज का मोबाइल व कुछ अन्य सामान भी जांच के लिए जब्त किए गए हैं।
पलंग पर मां के साथ मिली बेटियां –
जिला अस्पताल में जीवन और मौत के बीच झूल रहे मनोज कुशवाह पटेल की मां प्रेमरानी ने गुरुवार सुबह 5.30 बजे सबसे पहले उसे फर्श पर छटपटाते देखा था। जबकि बड़ी पोती सोनम (8) और सबसे छोटी बेटी जिया (5 माह) अपनी मां पूनम (32) के साथ कमरे में रखे पलंग पर बेसुध पड़ी थीं। तीनों को काफी हिलाया-डुलाया लेकिन उनके शरीर में कोई हरकत नहीं हुई तब प्रेमरानी ने चीख-पुकार मचाई तो पड़ोसी दौड़कर पहुंचे और एम्बुलेंस बुलाकर चारों को जिला अस्पताल ले गए। जहां डॉक्टर ने पूनम और दोनों बच्चियों को मृत घोषित कर दिया उनके गले पर रस्सी जैसी किसी चीज से कसावट के गहरे निशान थे। यह निशान मनोज के गले पर भी मिले हैं।
दादी के पास सो रही थीं इसलिए बचीं संध्या-सुलेखा –
प्रेमरानी ने बताया मनोज और पूनम की चार बेटियां थीं। इनमें से दो जुड़वा हैं। जुड़वा बहन संध्या और सुलेखा सात- सात साल की हैं व कक्षा दूसरी में पढ़ती हैं। दोनों को शुरू से ही दादी के पास सोने की आदत थी। बुधवार रात सुलेखा की मां के पास नींद लग गई थी लेकिन रात में वह जाग गई और रोने लगी। उसके रोने के कारण मनोज रात 3 बजे दादी के पास छोड़ गया था। बहू और दो नातिनों की मौत के शोक में डूबी प्रेमरानी का कहना था कि शायद उनके पास सोने से संध्या और सुलेखा की जान बच गई।
खबर लगने पर देवरी से सागर पहुंचा भाई –
परिवार में दुखद घटना की खबर लगने देवरी से लौटे महेश कुशवाह पटेल ने बताया कि वो भी पुट्टी के काम का ठेका लेता है। ठेके पर काम करने वह कुछ दिन से देवरी में था। उसे गुरुवार सुबह करीब 6 बजे घटना की जानकारी दी गई जिसके बाद वह घर लौटा। उसने बताया कि मनोज पहले उसी की तरह काम करता था। घर में पहले कभी विवाद की स्थिति नहीं रही। वे दो भाई और दो बहन हैं। चारों की शादी हो चुकी है।
फंदे पर झूलने तक सुसाइड नोट में लिखी हर बात –
एएसपी राजेश व्यास के अनुसार मनोज कुशवाहा पटेल पहले से ही आत्महत्या का मन बना चुका था। कमरे से मिले सुसाइड नोट में जिस तरह से हर बात लिखी है उससे लगता है जैसे रात में जागकर यह चि_ी लिखी गई होगी। बुधवार रात घर लौटकर- सुबह फंदे पर झूलने तक की हर बात मनोज ने सुसाइड नोट में लिखी है। उसने खत की शुरुआत में परिवार में अच्छे संबंध होने व आत्महत्या के प्लान की जानकारी देर रात को पत्नी पूनम को देने व उसकी सहमति से अपनी जान देने का उल्लेख किया है। सुसाइड नोट में मनोज ने लिखा है कि व पत्नी और बच्चियों के साथ जिस तरह शानदार जिंदगी जीना चाहता था वह नहीं जी पा रहा है। वह आर्थिक तंगी और बेरोजगारी के कारण उतना नहीं कमा पाता है। चि_ी में लिखा कि है मैंने दोनों बेटियों को मार दिया। पत्नी ने कहा यह बुरा काम है लेकिन मैंने यह कर किया। मेरे कहने पर पूनम भी फंदे पर झूल गई। उसे देखकर मेरे हाथ-पैर कांप रहे हैं। मैंने उसके मुंह पर रूमाल बांधा और नाक में कागज-रुई लगाई जिससे की बच न जाए। अगर बच गई तो बेइमानी होगी क्योंकि हमने एक साथ जीने-मरने की कसम खाई थी। परिवार में पुलिस किसी को परेशान ना करें क्योंकि सब बहुत अच्छे हैं और उन्हें बहुत चाहते हैं। उसने लिखा कि मैंने दरवाजे खुले छोड़ दिए हैं क्योंकि पता है सुबह 6 बजे तक कोई नहीं आएगा। परिवार के सभी लोग अच्छे हैं। पुलिस किसी को भी परेशान न करे।