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सतना में टिकैत बोले-सरकार की शह पर खनन माफिया सक्रिय, जिले-जिले में जाकर करेंगे आंदोलन

किसान सम्मेलन : कहा, मध्यप्रदेश में किसानों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब

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सतना. कृषि उपज मंडी में बुधवार को किसान सम्मेलन को संबोधित करते हुए किसान नेता राकेश टिकैत ने केंद्र और प्रदेश सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा, देश में मध्यप्रदेश में किसानों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। हमें फिर एक बड़ा आंदोलन करने की जरूरत है। फैक्ट्री वाले किसानों की जमीन छीनकर पैसा नहीं दे रहे। सतना में फैक्ट्री प्रबंधन और किसान के बीच समझौता हुआ था लेकिन लागू नहीं हुआ। मध्यप्रदेश में उन्हीं की सरकार है जिनकी केन्द्र में है। प्रदेश में सबसे ज्यादा खनन माफिया सक्रिय हैं, सरकार की शह पर ही इनका काम चल रहा है। हम जिले-जिले में जाएंगे और आंदोलन करेंगे। किसानों की समस्याओं को लेकर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के तत्वावधान में आयोजित किसान सम्मेलन में रीवा, पन्ना, छतरपुर, जबलपुर, कटनी, सीधी, सिंगरौली से बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। टिकैत ने कहा, सरकार पॉलिटिकल पार्टी को जैसे मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में तोडऩे का काम किया, उसी तरह अब किसान संगठनों में तोड़-फोड़ का प्रयास कर रही है। अगर विपक्ष के लोग कुछ बोलते हैं तो उनके घरों में छापे पड़ जाते हैं। पार्टी में शामिल होने का दबाव दिया जाता है। यहीं किसान नेताओं के साथ भी हो रहा है।

ये रहे अतिथि
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय महासचिव राजवीर सिंह जादौन, गजेन्द्र सिंह परिहार प्रभारी मध्यप्रदेश, उमेश पटेल प्रदेश सचिव व अन्य रहे। अध्यक्षता अनिल यादव प्रदेश अध्यक्ष मध्यप्रदेश ने की है। सम्मेलन के बाद टिकैत की मौजूदगी में प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम 13 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन रघुराजनगर एसडीएम को सौंपा गया। इसमें किसानों का कर्ज माफ करने, आवारा पशुओं के लिए गौशाला बनाने, निजी ट्रांसफार्मर की योजना को पुन: शुरू करने और जले ट्रांसफार्मर बदलने सहित अन्य मांगें शामिल हैं।
अडानी-अंबानी को बेच रहे प्लांट
टिकैत ने कहा, केंद्र सरकार ने 2 करोड़ बेरोजगारों को 2022 तक रोजगार देने की बात की थी, वो रोजगार कहां है। अब 2047 में आजादी के 100वें वर्ष में रोजगार की बात कही जा रही है। तब तक में देश की 70 फीसदी जमीन व्यापारियों के हाथ में चली जाएगी। आज सीमेंट प्लांट, स्टील प्लांट बड़े-बड़े उद्योग सिर्फ अडानी-अंबानी को ही बेचे जा रहे हैं। पूरे देश की प्रॉपर्टी को बेचने का काम किया जा रहा है। जब देश में बड़ा आंदोलन हो रहा था तब पंजाब के सिख समुदाय को बदनाम करने का काम यहीं सरकार कर रही थी। सरकार ने खाप पंचायत में भी तोड़-फोड़ का काम किया था। अब फिर बड़े आंदोलन की शुरुआत होगी। ट्रैक्टरों में बैठकर किसान आगे बढ़ेगे जहां पुलिस के बैरिकेट्स मिलेंगे वहीं आंदोलन शुरू करेंगे।
दिल्ली में झूठ बोल रही सरकार
सम्मेलन में समर्थन मूल्य पर धान बिक्री के बाद किसानों को भुगतान नहीं मिलने की बात सामने आई। टिकैत ने कहा, सरकार किसानों से एमएसपी पर गेहूं-धान खरीदती है, लेकिन पैसा नहीं मिलता। वहीं दिल्ली में सरकार दावा करती है कि किसानों का एक रुपए भुगतान नहीं रुकता। अब दस्तावेजों के आधार पर भारत सरकार के कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मिलकर बात करेंगे। किसानों की जमीन रेलवे में फंस रही है। 2013 के एक्ट में 5 लाख मुआवजा और नौकरी का प्रावधान था, लेकिन 10 साल में राशि दोगुनी भी नहीं हो सकी, अब नौकरी का प्रावधान भी नहीं है।