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सतना

सतना के बीच शहर घुसा तेंदुआ, 2 को काटा, 7 घंटे दहशत में रहे शहरवासी

मझगवां के जंगल से निकलकर शहर आया तेंदुआ बरदाडीह चौराहे से मुख्त्यारगंज तक मचाता रहा धमाचौकड़ी

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सतना. बरदाडीह चौराहे से लेकर मुख्त्यारगंज के बीच शुक्रवार को 7 घंटे तक दहशत का साया रहा। मझगवां के जंगल से तेंदुए के रूप में शहर में आई इस दहशत ने क्षेत्र के लोगों की सांस अटका दी। सुबह पांच बजे से दोपहर बारह बजे तक। तेंदुए की दस्तक के बाद से इलाके में अफरातफरी, डर और घबराहट का माहौल रहा। सुबह के समय कम लोग ही बाहर थे, लेकिन जो भी थे, वे तुरंत घरों में पहुंचकर सुरक्षित होना चाहते थे। लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे व्यक्ति भी थे, जो तेंदुए की झलक पाना चाहते थे। यह पता लगने पर कि तेंदुआ गली में एक घर में दुबक गया है, वे गली के मुहाने पर भी आ गए। पुलिस ने उन्हें रोका तो वे वहीं खड़े होकर नजारा करने लगे। इसके अलावा बड़ी संख्या में लोग घर में छत और बालकनी में जा खड़े हो गए। कई अपनी खिड़कियों की ओट लेकर तेंदुए को देखने की कोशिश कर रहे थे।

पांच बजे जंगल से बाहर निकला
तेंदुआ सुबह करीब पांच बजे जंगल से बाहर निकला था। उसे उस समय काली बाड़ी मंदिर के पास ही एक बाड़े में कूदते हुए देखा गया था। इसके बाद तेंदुआ रोड क्रॉस कर मुख्तियारगंज पहुंच गया। यहां सुबह तकरीबन 6 बजे राजकुमारी चौहान (35) पति गंगाराम चौहान घर के बाहर नजर आई तो तेंदुए ने उस पर हमला कर दिया। हमले से सकपकाई राजकुमारी की चीखें निकलने लगीं, तो मोहल्ले के लोग घरों के बाहर आ गए। तेंदुए को हमला करते देख उन्होंने शोर मचाना शुरू किया, तो तेंदुआ वहां से भाग निकला। लोगों ने राजकुमारी को संभाला, जिसके शरीर में कई जगह गहरे घाव बन गए थे।

दो घंटे मोहल्ले में घूमता रहा
तेंदुआ वहां से निकलकर लगभग दो घंटे तक मोहल्ले में ही इधर उधर घूमता रहा। इसी बीच सुबह करीब आठ बजे तेंदुआ वोशजीव श्रीवास्तव के घर में घुस गया। उसने घर में अपनेे पिता और भाई के साथ घर की साफ सफाई के लिए किशन श्रीवास्तव (25) पुत्र राजेश श्रीवास्तव पर हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। किशन और इसके परिजन ने खुद को कमरों में बंद कर जान बचाई। पुलिस, प्रशासन और वन विभाग की टीमों ने इस परिवार को बाहर निकाला। इस दौरान तेंदुआ वहीं सीढिय़ों के नीचे बैठा रहा। इसके बाद मुकुंदपुर से रेस्क्यू टीम को भी सतना बुला लिया गया। इस टीम के आने के बाद सुबह लगभग सवा 9 बजे से तेंदुए को रेस्क्यू करने की कोशिश शुरू हो पाई।

तीन घंटे बाद आया काबू
रेस्क्यू टीम को तेंदुए को काबू में करने में तीन घंटे लगे। उसकी पोजीशन लेकर उसे ट्रेंकुलाइज (बेहोश) करने के लिए शॉट लगाए जाते रहे। दोपहर करीब बारह बजे तेंदुए को एक शॉट लग पाया। इसके दस मिनट में वह बेहोश हो गया, तो टीम ने राहत की सांस ली। इस समय तक चारों तरफ भीड़ ही भीड़ थी। रेस्क्यू टीम ने तुरंत तेंदुए को उठाया और भीड़ के बीच से निकलकर रेस्क्यू वाहन में पिंजरे में डाला। स्वास्थ्य परीक्षण कर उसके रक्त के नमूने लिए गए। उसका ब्लडप्रेशर और तापमान भी मापा गया। इसके बाद उसे होश में लाने का इंजेक्शन देकर संजय गांधी नेशनल पार्क के समीप जंगल में ले जाकर छोड़ दिया गया।