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sidhi: चार घंटे बंद रही जिला अस्पताल की बिजली, गर्मी से बेहाल रहे मरीज व परिजन

प्रशवोत्तर कक्ष एवं फीमेल सार्जिकल वार्ड में जनरेटर से विद्युत प्रवाह बाधित होने के कारण बढ़ी परेशानी-हाथ पंखा से हवा करते परेशान रहे मरीजों के परिजन

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सीधी। जिला अस्पताल सीधी में शनिवार को दोपहर से शाम तक विद्युत आपूर्ति बाधित होने से भर्ती मरीजों एवं उनके परिजनों का गर्मी से बुराहाल रहा। वार्ड के एसी, कूलर व पंखे बंद होने के कारण गर्मी से बेहाल मरीज व उनके परिजन हाथ पंखा से गर्मी दूर करने के प्रयास में जुटे रहे। वार्ड में मरीजों व परिजनों की भीड़ के कारण तापमान और अधिक बढऩे से पसीना नहीं रूक रहा था। इस दौरान गर्मी से बेहाल मरीज एवं परिजन जिला अस्पताल प्रबंधन को कोसते नजर आए।
दरअसल तकनीकि समस्या के कारण अस्पताल तिराहा फीडर की विद्युत आपूर्ति दोपहर करीब 3 बजे बाधित हो गई। सुधार करने में करीब चार घंटे का समय लग गया। इस दौरान जिला अस्पताल प्रबंधन द्वारा तीनों जनरेटर चालू तो किये गए, लेकिन प्रशवोत्तर कक्ष तथा फीमेल सार्जिकल वार्ड में जनरेटर के माध्यम से बिजली सप्लाई नहीं पहुंच रही थी, जिसके कारण यहां भर्ती मरीजों एवं उनके परिजनों का गर्मी से बुराहाल रहा।
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लोड ज्यादा बढऩे से दो वार्डों में रोका गया प्रवाह-
जिला अस्पताल प्रबंधन का तर्क रहा कि यहां तीन जनरेटर है, जिसमें एक जनरेटर से ऑपरेशन थिएटर, दूसरे से पीआईसीयू तथा तीसरे जनरेटर से वार्डों में बिजली बंद होने पर आपूर्ति की जाती है। लेकिन वार्डों में सप्लाई देने वाला जनरेटर लोड नहीं ले पा रहा था और वह बंद हो जाता था, जिससे दो वार्डों प्रशवोत्तर वार्ड तथा फीमेल सार्जिकल वार्ड का कनेक्शन काटना पड़ा, जिससे जनरेटर चल पाया।
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आए दिन होती है समस्या-
जिला अस्पताल में बिजली आपूर्ति बाधित होने पर तीन जनरेटर की व्यवस्था है। ओटी, आईसीयू, पीआईसीयू वार्डों के लिए अलग तथा सामान्य वार्डों के लिए अलग-अलग जनरेटर हैं। लेकिन अक्सर यह देखने को मिलता है कि जब बिजली आपूर्ति ज्यादा समय के लिए बाधित होती है, वार्डों के जनरेटर नहीं चलाए जाते, जिससे गर्मी के मौसम में मरीजों को परेशान होना पड़ता है।
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ओवर लोड की आ रही थी समस्या-
बिजली गुल होने पर तीनो जनरेटर चलाए गए थे। वार्डों में सप्लाई वाले जनरेटर में ज्यादा लोड के कारण चल नहीं पा रहा था, जिससे दो वार्डों का कनेक्शन काटना पड़ा, इसके बाद जनरेटर चल पाया। इसके अलावा कोई विकल्प नहीं था।
डॉ.हरिओम सिंह, प्रभारी सिविल सर्जन
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