शहडोल. मोहनराम मंदिर में भगवान के लिए श्रावण मास का झूला कजली तीज को डाला गया था। तेरह दिनों तक मंदिर में विशेष पूजा अर्चना के साथ भगवान को झूला झुलाया गया। इस दौरान विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। मंदिर चित्रकूट से आई मंडली शाम को भजन कीर्तन के साथ नृत्य व संगीत का कार्यक्रम प्रस्तुत किया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओ की भीड़ लगती है। मंदिर के पुजारी लवकुश शास्त्री ने बताया कि सावन में भगवान को झूला झूलने का बड़ा महत्व है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। जो व्यक्ति भगवान को झूला झुलाता है, वह सभी प्रकार के कष्ट से दूर हो जाता है। कहा जाता है कि भगवान श्री कृष्ण ने राधा रानी को सावन में झूला झूलाया था। तब से यह परंपरा चली आ रही है, और हर कोई सावन में झूला झूलता है। अपनी मनोकामना के लिए गीतों के माध्यम से श्रीकृष्ण तक संदेश पहुंचाई जाती है। वेद पुराणों में भोलेनाथ माता पार्वती को झूला झूलाने का भी उल्लेख किया गया है। लोकगीतों में भी भगवान श्रीराम माता सीता सहित तीज त्योहार पर झूाल झूलने का आनंद लेते हैं। हरियाली तीज का पर्व तो झूले के बिना अधूरा माना जाता है।