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श्रमिकों की जिंदगी से खिलवाड़, बिना सुरक्षा उपकरणों के करा रहे काम
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श्रमिकों की जिंदगी से खिलवाड़, बिना सुरक्षा उपकरणों के करा रहे काम

निर्माणाधीन पानी की टंकियों सहित ऊंची ईमारतों में मजदूरों को काम के दौरान नहीं उपलब्ध कराये जा रहे सुरक्षा उपकरण

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सीधी। निर्माण कार्यों में संलग्र श्रमिकों के जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है। संविदाकारों द्वारा श्रमिकों को सुरक्षा उपकरण प्रदान नहीं किया जा रहा है, जिससे हादसों का खतरा बना रहता है। गुरूवार को शहर के शासकीय नर्सिंग कॉलेज के छात्रावास भवन की पुताई करने के दौरान बिना सुरक्षा उपकरण कार्य कर रहे श्रमिक की चौथी मंजिल से गिरने से मौत हो गई। इस मामले में श्रमिकों की शिकायत के बाद कोतवाली पुलिस द्वारा विभिन्न धाराओं के तहत संविदाकार ओंकार शुक्ला एवं सरोज कुशवाहा के विरूद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) के तहत अपराध दर्ज कर लिया गया है। लेकिन इस हादसे के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा निर्माण कार्यों में मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चि कराने की दिशा में पहल नहीं की जा रही है। शहर सहित ग्रामीण अंचलों में चल रहे निर्माण कार्यों में बिना सुरक्षा उपकरणों के श्रमिक उचाइयों में कार्य कर रहे हैं, जिससे हादसों का खतरा बना हुआ है।

पत्रिका द्वारा शुक्रवार को शहर सहित ग्रामीण अंचलों में चल रहे विभिन्न निर्माण कार्यों का जायजा लिया गया तो वहां कार्यरत श्रमिकों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने में बड़ी चूक देखने को मिली। निर्माण कार्यों में कार्यरत श्रमिक बिना सुरक्षा उपकरण जान जोखिम में डालकर कार्य करते नजर आए।

केस नंबर-1
बिना सुरक्षा उपकरण तीसरी मंजिल में कार्य कर रहे श्रमिक-

शहर के सिविल लाइन मुहल्ले में कलेक्टर आवास के सामने न्यायाधीशों के आवास का निर्माण किया जा रहा है। यहां ग्राउंड फ्लोर के अलावा तीन मंजिला इमारत में के निर्माण में श्रमिक बिना सुरक्षा के उपकरण के जान जोखिम में डालकर कार्य करते नजर आए। श्रमिकों को सिर पर न तो हेलमेट दिखा और न ही हाथों में दस्ताने। जबकि श्रमिक 40 फिट की ऊं चाई पर लटकते हुए भाड़ा बांधने का कार्य कर रहे थे। जब जिले के सबसे प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी कलेक्टर के आवास के सामने इस तरह की मनमानी की जा रही है तो अन्य स्थलों में का क्या हाल होगा इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

केस नंबर-2
ट्रामा सेंटर भवन के निर्माण में भी सुरक्षा की अनदेखी-

शहर के जिला अस्पताल परिसर में एमसीएच विंग के तीसरे मंजिल में ट्रामा सेंटर का निर्माण किया जा रहा है। यहां करीब तीस फिट की उंचाई पर श्रमिक बिना सुरक्षा उपकरणों के कार्य करते नजर आए। गुरूवार को जिला अस्पताल परिसर स्थित नर्सिंग कॉलेज भवन में ही हुए हादसे में श्रमिक की मौत हुई है, लेकिन इस हादसे के बाद भी न तो संविदाकार द्वारा श्रमिकों के सुरक्षा का ख्याल किया गया और न ही जिम्मेदार अधिकारियों ने ही श्रमिकों को सुरक्षा संबंधी उपकरण की व्यवस्था सुनिश्चित कराने की सुध ली।

केस नं.-3
नवीन कलेक्ट्रेट भवन में भी श्रमिकों के सुरक्षा की अनदेखी-

मप्र गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल संभाग सिंगरौली के तहत पुराने कलेक्ट्रेट भवन सीधी के परिसर में नवीन कलेक्ट्रेट भवन का निर्माण किया जा रहा है। यहां भी तीसरी मंजिल में निर्माण कार्य जारी है। लेकिन निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों को संविदाकार द्वार सुरक्षा संबंधी उपकरण उपलब्ध नहीं कराये गए हैं। श्रमिक जान जोखिम में डालकर काफी उंचाई में कार्य करते नजर आ रहे हैं। कलेक्टे्रट के पास निर्माण कार्य होने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारी श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं करा पा रहे हैं।

केस नंबर-4
जल निगम की पानी टंकियों में भी सुरक्षा की अनदेखी-

जल निगम के तहत ग्रामीण अंचलों में पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित कराने के लिए पानी की टंकियों का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। यहां भी तीस से चालीस फिट की उंचाई पर श्रमिक जान जोखिम में डालकर कार्य कर रहे हैं। संविदाकारों द्वारा कार्य में संलग्र श्रमिकों को सुरक्षा उपकरण मुहैया नहीं कराए जा रहे हैं। जनपद पंचायत मझौली अंतर्गत ग्राम पंचायत जोड़ौरी के ग्राम पोंड़ी में निर्माणाधीन पानी की टंकी में मजदूर उंचाई पर बिना सुरक्षा उपकरण के कार्य करते नजर आए।

नियमानुसार ऐसा होना चाहिए-
मजदूरों को निर्माण कार्य करने से पहले हेलमेट, हाथों में दस्ताने, पैरों में जूते अनिवार्य होने चाहिए। जो मजदूर उंचाई पर काम करते हंै उनके लिए खासकर झूले का इंतजाम किया जाना चाहिए। इसके साथ जिन मजदूर महिलाओं के छोटे बच्चे हैं उनके लिए निर्माणाधीन स्थल के नजदीक एक कमरे में उन बच्चों को संभालने के लिए एक आया होनी चाहिए। इसके साथ इन बच्चों के लिए नाश्ते के लिए बिस्किट, फल, दूध आदि का इंतजाम किया होना चाहिए। निर्माणाधीन इमारत के चारो तरफ जाल लगा होना चाहिए। जो मजदूर उंचाई पर काम करते हैं यदि वह झूले से गिर भी जाए तो जाल में फंसकर बच सकें। खासकर मजदूरों को काम पर जाने से पहले उनके सारे उपकरण की जांच के बाद ही उनसे काम करवाना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है।

वर्जन-
की जा रही है जांच-

निर्माण कार्यों में श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर नियम और मापदंड निर्धारित किये गए हैं, जिसका पालन संविदाकारों को किया जाना चाहिए। जांच कार्रवाई को लेकर विभागीय स्तर पर कई पेंच हैं, जिसके कारण कार्रवाई सुनिश्चित नहीं हो पाती है। हालांकि वरिष्ठ कार्यालय से अनुमति लेकन शहरी क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्यों की जांच कर श्रमिकों की सुरक्षा संबंधी मापदंड सुनिश्चित किये जाएंगे।
दीपक डहरवाल, श्रम निरीक्षक सीधी