सीधी। ललितपुर-सिंगरौली रेलवे लाइन से प्रभावित किसान, मजदूर व युवाओं के साथ पिछले 13 दिनों से वीथिका भवन में आमरण अनशन कर रहे शिवसेना के पदाधिकारियों द्वारा इस मंगलवार को भी जनसुनवाई के बाद जिला पंचायत के मुख्य द्वारा को घेरकर विरोध प्रदर्शन किया गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने जिला पंचायत के गेट पर सिर के बाल मुंडन कराकर अनोखा विरोध दर्ज कराया। जनसुनवाई के समाप्त होने के पहले ही जिला पंचायत कार्यालय का मुख्य द्वारा घेर कर विरोध प्रदर्शन करने से एक बार फिर अधिकारी-कर्मचारी कार्यालय में कैद हो गए। करीब एक घंटे से ऊपर विरोध प्रदर्शन के बाद अपर कलेक्टर राजेश शाही की समझाइस व आश्वासन के बाद शिवसेना ने विरोध प्रदर्शन समाप्त किया, जिसके बाद अधिकारी-कर्मचारी कार्यालय से निकल पाए। विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ी संख्या में पुलिस बल भी मौजूद रहा। बता दें कि गत मंगलवार को भी शिवसेना द्वारा इसी मुद्दे को लेकर इसी स्थल पर विरोध प्रदर्शन किया गया था।
विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे शिवसेना प्रदेश उपाध्यक्ष विवेक पांडेय ने बताया, ललितपुर-सिंगरौली रेल लाइन की समस्या से पीडि़त परिवार किसान मजदूर साथियों की समस्या को लेकर 13 दिन से वीथिका भवन परिसर में आमरण अनशन चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं। ऐसी स्थिति में पीडि़त किसान मजदूर साथियों के साथ दूसरी बार जिला पंचायत का घेराव करना पड़ा। बीते सप्ताह विरोध प्रदर्शन के दौरान एसडीएम गोपद द्वारा इस विषय पर पीडि़त किसान मजदूर साथियों के साथ चर्चा के बाद आस्वस्त किया गया था कि एक सप्ताह में समस्याओं का निराकरण को लेकर आवश्यक पहल की जाएगी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिसके कारण दोबारा जिला पंचायत कार्यालय का घेराव करना पड़ा। विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से आनंद साहू, राम दरस विश्वकर्मा, मिश्रा बंसल, बृजेश बंसल ने सिर के बाद का मुंडन करवाकर जिला प्रशासन एवं रेलवे का विरोध जताया। बताया कि आमरण अनशन मांगे पूरी न होने तक जारी रहेगा। आंदोनल प्रदर्शन में मुख्य रूप से पीडि़त किसान हीरा सिंह, ऋ षि पांडेय, चंद्रिका रावत, राहुल गुप्ता, शिवसेना जिलाध्यक्ष बेनाम सिंह बघेल, संभाग उपाध्यक्ष प्रदीप विश्वकर्मा, राम सजीवन जायसवाल, सुनील रावत, जैनेंद्र सिंह चौहान सहित कई शिवसैनिक मौजूद रहे।
बाउंड्री कूदकर बाहर निकले आवेदक-
शिवसेना द्वारा जनसुनवाई समाप्त होने के बाद जिला पंचायत कार्यालय का मुख्य द्वार घेरकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया गया था। लेकिन इस दौरान कई ऐसे आवेदक जिन्हें आवेदन की पावती नहीं मिल पाई थी, वह कार्यालय परिसर से बाहर नहीं निकल पाए थे। ऐसे में आंदोलन के दौरान वह जिला पंचायत कार्यालय की बाउंड्री वाल कूदकर बाहर निकलते नजर आए। जबकि विभिन्न विभागों के अधिकारी कर्मचारी कार्यालय में ही कैद होकर रह गए, जो आंदोलन समाप्त होने के बाद बाहर निकल पाए।