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Video: संजय टाइगर रिजर्व की बाघिन की संघर्ष से सफलता तक की कहानी

MP News: प्राकृतिक आवास में पूरी तरह स्थापित हुई बाघिन टी-54, हटाया गया रेडियो कालर, जानिए संजय टाइगर रिजर्व की बाघिन की संघर्ष से सफलता तक की कहानी।

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Avantika Pandey

Apr 03, 2026

MP News: दो बाघ शावक (दोनों मादा), जो बाघिन T3 के बच्चे थे, को दिसंबर 2020 में ब्यौहारी बफर क्षेत्र से पकड़ा गया था। इसके बाद उन्हें बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के एनक्लोजर में रखा गया। लगभग एक साल बाद 2 दिसंबर 2021 को उन्हें फिर से जंगल में छोड़ने की योजना बनी। इस दौरान एक बाघिन को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व भेजा गया और दूसरी को संजय टाइगर रिजर्व (Sanjay Tiger Reserve) में छोड़ा गया, जिसे आईडी T32 दी गई।

बाघिन T32 ने वर्ष 2022 में दो शावकों (एक नर और एक मादा) को जन्म दिया। लेकिन 12 मार्च 2023 को T32 की मृत्यु हो गई, जिससे दोनों शावक अनाथ हो गए। इसके बाद 17 मार्च 2023 को वन विभाग ने दोनों शावकों का रेस्क्यू कर उन्हें दुबरी टाइगर एनक्लोजर में सुरक्षित रखा।

जून 2024 में एनक्लोजर में पाले गए बाघों में से मादा बाघ T54 को रेडियो कॉलर लगाकर बस्तुआ क्षेत्र में छोड़ा गया। करीब दो वर्षों की सतत मॉनिटरिंग और सुरक्षा के बाद यह बाघिन पोंडी और बस्तुआ क्षेत्र में पूरी तरह से स्थापित हो गई।

मार्च 2026 में इस बाघिन के पहले लिटर (पहली बार) में तीन शावकों की मौजूदगी दर्ज की गई। यह इस बात का प्रमाण है कि अब यह बाघिन पूरी तरह से अपने प्राकृतिक आवास में खुद को स्थापित कर चुकी है और सफलतापूर्वक अपना वंश आगे बढ़ा रही है। यह कहानी वन विभाग के सफल संरक्षण प्रयासों और बाघों के पुनर्वास की एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।