सीधी। प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपे जाने के विरोध में शनिवार को जिला अस्पताल बचावा-जिउ बचावा संघर्ष मोर्चा द्वारा कलेक्ट्रेट के सामने वीथिका भवन परिसर में सत्याग्रह आंदोलन किया गया।
आंदोलन की अध्यक्षता कर रहे टोको, रोको, ठोको क्रांतिकारी मोर्चा के संयोजक उमेश तिवारी ने कहा, प्रदेश के 12 जिला अस्पताल, 348 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और 161 सिविल अस्पताल को ठेकेदारी में दिए जाने के प्रदेश सरकार के निर्णय के विरोध में सीधी जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सेमरिया, चुरहट, रामपुर, खाम्ह, मझौली, कुसमी और सिहावल में अस्पताल बचावा-जिउ बचावा सत्याग्रह आंदोलन के बाद सीधी कलेक्ट्रेट के सामने सत्याग्रह आंदोलन किया जा रहा है। तिवारी ने कहा, मप्र एक ऐसा प्रदेश है जिसमें एक तिहाई जनसंख्या गरीबी रेखा से नीचे आती है। साथ ही कुपोषित शिशुओं और मातृ मृत्यु दर का रेशियो देश में सबसे ज्यादा है। वहां जनता की जीवनरक्षा के लिए उपलब्ध न्यूनतम राहत का जरिया रहे इन सरकारी अस्पतालों का भी निजीकरण करने से प्रदेश का गरीब और मध्यमवर्गीय तबका इलाज से पूरी तरह महरूम हो जाएगा। आम गरीब मजदूर बिना इलाज के ही दम तोड़ देगा। जन विरोध एवं स्वास्थ्य संगठनों के विरोध के चलते प्रदेश सरकार अधूरी मांगो को माननें कि बात कही जा रही है। सरकार के इस घोर जन विरोधी निर्णय पर विपक्षी पार्टियों कि चुप्पी घोर निंदनीय है।
जनविरोधी है निर्णय-
जन स्वास्थ्य अभियान के राष्ट्रीय संयोजक अमूल निधि ने कहा, मप्र सरकार कैबिनेट द्वारा प्रदेश के अस्पतालों को पीपीपी मॉडल पर निजी हाथों में देने के निर्णय जन विरोधी है। बरगी बांध जबलपुर विस्थापित संघ के राजकुमार सिन्हा ने कहा, विंध्य समाजवादियों का गढ़ रहा है, निजीकरण व्यवस्था से आप इंसानियत की उम्मीद नहीं कर सकते, आपको लड़ाई लडऩी ही होगी। इस अवसर पर राष्ट्रीय संगठन मंत्री किसान मजदूर महासंघ रवि दत्त सिंह, रिटायर्ड डीएसपी लालदेव सिंह, ददन सिंह, उर्मिला रावत, प्रभात वर्मा, जगन्नाथ द्विवेदी, विवेक कोल, देवेंद्र सिंह चौहान दिनेश सिंह चौहान, विकास नारायण तिवारी आदि ने भी विचार रखे।
रैली के बाद राज्यपाल के नाम सौंपा ज्ञापन-
धरना प्रदर्शन के बाद शहर में रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया गया। इसके बाद कलेक्टे्रेट पहुंचकर राज्यपाल के नाम 6 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा गया। धरना प्रदर्शन में मोर्चा के पदाधिकारियों के साथ गणमान्य नागरिक भी शामिल रहे।