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काहे लाये नथुनिया उधार बलमा, लोकगीत पर थिरके स्रोता

राष्ट्रीय बाणभट् समारोह के दूसरे दिन उप्र, बिहार, झारखंड के लोक गायकों ने बांधा समा

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सीधी। राष्ट्रीय बाणभट्ट महोत्सव परसिली के दूसरे दिन जिले के लोक गायकों के साथ ही उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड के कलाकारों ने अपने प्रदेशों के लोकगीतों की प्रस्तुति से समा बांध दिया। मनमोहक लोकगीतों पर श्रोता थिरकने को मजबूर हो गया। महोत्सव के दूसरे दिन का शुभारंभ समाजसेवी डॉ.अनूप मिश्रा, जिला पंचायत सदस्य सुमन कोल व कृष्णलाल प्यासी, सीमा पांडेय, ममता शुक्ला के आतिथ्य में दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।

बता दें कि मप्र पर्यटन निगम भोपाल, जिला पुरातत्व पर्यटन एवं संस्कृति परिषद के सहयोग से उत्थान सामाजिक सांस्कृतिक एवं साहित्यिक समिति के द्वारा परसिली में तीन दिवसीय राष्ट्रीय बाणभट्ट महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। महोत्सव में देश के विभिन्न प्रांतों के लोक कलाकार शामिल होकर रंगारंग प्रस्तुति दे रहे हैं। द्वितीय दिवस शनिवार की शाम राष्ट्रीय लोक गायिका मान्या पांडेय ने बघेली लोकगीत धना काहे का रात रिसिआनी, गढ़ाई देव दुई झूलनी, मइया सुरतिया हो मियां सुरतिया, भोर पहरा मा नहीं आये सहित बघेली संस्कार गीत, आदिवासी गीतों व विकास गीतों की प्रस्तुति दी। बरेली उत्तर प्रदेश से आई लोक गायिका वैष्णवी राय ने काहे लाये नथुनिया उधार बलमा…, पटना बिहार की लोक गायिका संजना राय ने मोर्या पहिर रामजी, घूमेलन भवनवा। झारखंड के लोक गायक सुभाष राय ने सुनिला अराजिया गंगा, करा ना विचार हो की प्रस्तुति दी। वहीं जिले की लोक गायिका दिव्या द्विवेदी ने नजर लागी राजा तोहरे बगले में…, मानसी तिवारी ने कुसुम रंग सारी रे…, अर्पणा मिश्रा ने विवाह गीत गारी की मनमोहक प्रस्तुति दी। इस अवसर पर लोक वादक कपिल तिवारी, पवन शुक्ला, कर्णबीर सिंह, प्रकाश मिश्रा, कृष्ण जन्म द्विवेदी को अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया।

लोकगीतों में मानवीय मूल्य व सम्मान का भाव-
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ.अनूप मिश्रा ने कहा, लोकगीतों में जीवन के हर पहलू का चित्रण होता है। लोकगीतों में लोकमानस की सहज अभिव्यक्ति होती है और इनमें मानवीय मूल्य और सम्मान का भाव छिपा रहता है। उन्होंने बघेली लोकगीतों के लिए काम कर रही उत्थान सामाजिक सांस्कृतिक एवं साहित्यिक समिति सीधी के संरक्षक अखिलेश पांडेय एवं उनके टीम की सराहना की। इस अवसर पर अन्य अतिथियों ने भी विचार रखे।

कलाकारों को किया गया सम्मानित-
कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि डॉ.अनूप मिश्रा सहित अन्य अतिथियों ने देश के विभिन्न प्रांतों के साथ ही कार्यक्रम में प्रस्तुति देने वाले विंध्य क्षेत्र के लोक कलाकारों को सॉल, श्रीफल व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से परसिली रिसोर्ट के प्रबंधक राजेंद्र द्विवेदी, तहसीलदार बाल्मीक साकेत, रेंजर नीलेश द्विवेदी, एसडीओ स्तुति गौतम, संतोष शुक्ला, प्रमोद द्विवेदी, आदित्य सिंह, डॉ.विक्रम सिंह, अरविंद सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित रहे।