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सिरोही

VIDEO कथा में भक्त नरसी मेहता के नारायण प्रेम एवं अटूट विश्वास का किया वर्णन

सिरोही. शहर में चल रही कथा की पूर्व संध्या पर नानी बाई रो मायरो के तृतीय दिवस बुधवार की कथा में भक्त नरसी मेहता के नारायण प्रेम एवं अटूट विश्वास का वर्णन किया।

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सिरोही. शहर में चल रही कथा की पूर्व संध्या पर नानी बाई रो मायरो के तृतीय दिवस बुधवार की कथा में भक्त नरसी मेहता के नारायण प्रेम एवं अटूट विश्वास का वर्णन किया। भगवान नारायण स्वयं एक हाथी के वश में संत नरसी मेहता को मिले एवं उनकी टूटी-फूटी बैलगाड़ी को ठीक कर हीरे जवाहरात से रतन से जडि़त कर गांव अंजार मायरा भरने पहुंचे। कथा में नानी बाई को अपनी पिता से मिलने के बाद अपनी मां का स्मरण आया। इस दृश्य को संत भाई संतोष सागर ने कथा वाणी एवं भजन की ओर से धरातल पर उतारा तो पांडाल में भाव विभोर भक्तों के अश्रु धारा बह निकली। प्रात: काल नरेंद्र पाल सिंह, महेंद्र पाल सिंह, मगनलाल माली, राजेंद्र सिंह राठौड़, सुनील गुप्ता आदि भक्तों की ओर से परिवार सहित सर्व कल्याण के लिए विष्णु सहस्त्रनाम लक्ष्मी एवं गणेश यज्ञ कर विश्व शांति के लिए आहुतियां दी।

भाई संतोष सागर ने 19 प्रकार की गोपियों का वृतांत बताए एवं गोपी गीत सुनाए। गोपियों के अहंकार का नाश हुआ एवं करोड़ों गोपियों के साथ करोड़ों कृष्ण भक्ति रसपान किया एवं महारास के दर्शन हुए। कृष्ण और गौ प्रेम एवं गोभक्ति की व्याख्या करते हुए बताया जिस घर में गाय की सेवा होती है, वहां 33 कोटी देवता निवास करते हैं ।

भाई संतोष सागर में श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं के साथ कंस वध का भी वृतांत सुनाया तथा कृष्ण बलदेव द्वारा राजा ऊग्रसेन एवं देवकी एवं वासुदेव को जेल से मुक्त कर राजा उग्रसेन को पुन: राजा बनाने की कथा बताई । कथा में संत तीर्थगिरी महाराज, संत पागल बाबा, संत रामाज्ञा दास महाराज का भी सानिध्य रहा। तीर्थगिरी महाराज ने वर्तमान समय में भागवत रसपान एवं उसके माध्यम से राष्ट्र निर्माण का आह्वान किया। संत पागल बाबा ने भी भक्तों को भाव से जुडऩे एवं क्रोध और व्यसन को त्याग कर एवं घर में शांति बनाए रखने का आह्वान किया।

कथा में मदन सिंह परमार, नरेंद्र सिंह डाबी, राज वाघेला, गणपत सिंह देवड़ा, ओंकार सिंह उदावत, आचार्य पंडित आशुतोष, भगवती लाल ओझा, महेंद्र पाल सिंह, नरेंद्र पाल सिंह, विजय पाल सिंह, रामलाल खंडेलवाल, राजेंद्र सिंह राठौड़, करण सिंह डाबी, रामचंद्र प्रजापत, बाबूलाल प्रजापत, विक्रम सिंह यादव, हमीर सिंह राव, राधेश्याम मिश्रा, घनश्याम मिश्र, जगदीश सिंह गुर्जर सहित सैकड़ों भक्तगणों का सानिध्य एवं सहयोग रहा।