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सोनभद्र

दंगल गर्ल गीता से प्रभावित हुईं ये आदिवासी लड़कियां, देश के लिए तीरंदाजी में बहा रहीं पसीना

बेहद पिछड़ा और आदिवासी क्षेत्र है बभनी, नहीं ले रही कोई सरकारी सुविधा...

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सोनभद्र. कहते हैं प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती। जरूरत होती है उसे सवारने और निखारने की। जनपद के सुदूर आदिवासी क्षेत्र बभनी के कई गांवों की बेटियों के सिर पर तीरंदाज़ी खेल का जुनून सिर चढ़कर बोल रहा है। परम्परागत तीरंदाज़ी की आदिवासी कला को हथियार बनाकर ये लड़कियां आधुनिक ‘आर्चरी’ के खेल में अपना स्थान बनाने का प्रयास कर रहीं हैं। इसके लिए स्थानीय प्रबुद्ध लोग इनकी हर संभव मदद कर रहे हैं। इन बेटियों में हाल में ही अखिल भारतीय बनवासी कल्याण आश्रम द्वारा भोपाल (मध्य प्रदेश) में आयोजित प्रतियोगिता में साधना उर्फ़ कमलेश कुमारी और फूलमती ने अच्छा प्रदर्शन किया है। लड़कियों का कहना है कि, अगर उन्हें सरकारी मदद मिले तो वह तीरंदाज़ी के खेल में जिले और प्रदेश का नाम रोशन कर सकती हैं।

उत्तर प्रदेश के आखिरी छोर यानि सोनभद्र के जिला मुख्यालय से 115 किमी दूर बभनी क्षेत्र की लड़कियां तीरंदाज़ी के खेल में जमकर पसीना बहा रही हैं। दंगल फ़िल्म की गीता फोगाट से प्रभावित साधना उर्फ़ कमलेश कुमारी व फूलमती कुमारी का कहना है कि, वह तीरंदाज़ी के खेल में नाम कमाना चाहती है और जिले और प्रदेश का नाम रोशन करना चाहती है।

बभनी ब्लॉक के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूल के परिसर में वहां के प्रिंसिपल की मदद से ये लड़कियां प्रैक्टिस करतीं हैं। लड़कियों का कहना है कि, प्रिंसिपल फेकूराम शर्मा की मदद से ही वह आगे बढ़ पाई । इन लड़कियों का कहना है कि, अखिल भारतीय बनवासी कल्याण आश्रम द्वारा भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में तीरंदाजी की स्पर्धा में दूसरा और तीसरा स्थान हासिल किया है।

वहीं इन खिलाड़ियों के के लिए स्थान और संसाधन उपलब्ध कराने वाले उच्च प्राथमिक विद्यालय बबनी के प्रिंसिपल फेकू राम शर्मा का कहना है कि, इन लड़कियों के अंदर काफी प्रतिभा है लेकिन उनके लिए संसाधन उपलब्ध नहीं है। हम अपनी जेब से उनके खेल के सामान की व्यवस्था करते हैं अगर उन्हें सरकारी मदद मिले काफी आगे तक जा सकती है।

by जितेंद्र गुप्ता