जयपुर/कोटपूतली. स्थानीय नगर परिषद पार्क के हाल इन दिनों खराब हैं। यह पार्क कभी बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए सुबह-शाम टहलने, योग, एक्सरसाइज करने के लिए शहर के बीचों-बीच एकमात्र सार्वजनिक स्थान हुआ करता था, लेकिन अब नगर परिषद प्रशासन की अनदेखी और उपेक्षा का शिकार होकर यह पार्क अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। शहर की गंदी नालियों का पानी पार्क में भर गया है, जिससे इसने एक गंदे जलाशय का रूप ले लिया है। गंदगी और बदबू से आसपास के लोग परेशान हैं। समय पर घास की कटाई नहीं होने से पूरे पार्क में 1 से 2 फीट तक की खरपतवार खड़ी हो गई है।
ओपन जिम भी हो रही खराब
पार्क के अंदर ओपन जिम, ट्रैकिंग ट्रैक और बैठने की जगह सब कुछ गंदे पानी में डूबे हुए हैं। इस दुर्गंध के कारण लोगों ने पार्क में आना बंद कर दिया है। ओपन जिम में लगी मशीनें तक खराब हो रही है।
पौधे भी हो गए खराब
घोर लापरवाही का आलम यह है कि मुख्यमंत्री वृक्षारोपण अभियान की भी धज्जियां उड़ाई गई ‘एक पेड़ मां के नाम’ योजना के तहत नगर परिषद ने पार्क में हजारों पौधे बिक्री के लिए रखे थे, जो गंदे पानी में डूबकर खराब हो गए हैं। न तो उन्हें कहीं लगाया गया और न ही बेचा गया, जिससे योजना का उद्देश्य अधूरा रह गया।
लगे हैं कचरे के ढेर
मुख्य प्रवेश द्वार से ही इस पार्क की बदहाली की झलक मिलती है। प्रवेश के दोनों ओर कचरे के ढेर लगे हुए हैं जो मुख्य द्वार को ही बदसूरत बना रहे हैं। पार्क के अंदर कचरा पात्र भी कचरे से अटे पड़े हैं और जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं।
नगर परिषद पार्क में लगी मुक्तिलाल मोदी व डॉ. भीमराव अंबेडकर जैसे महापुरुषों की मूर्तियां भी गंदे पानी के जल भराव के बीच खड़ी हैं। घोर उपेक्षा व लापरवाही का शिकार होता शहर के मध्य स्थित यह पार्क कस्बे का हृदय स्थल है, जो अनेक ऐतिहासिक, सामाजिक व राजनीतिक स्मृतियां संजोए हुए हैं। आज यह पार्क देखरेख व सुरक्षा इंतजाम के अभाव में समाजकंटकों का अड्डा बन चुका है। पार्क की दुर्दशा की वजह से लोगों ने इस पार्क से दूरी बना ली है।