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चिकित्सक लाचार, बिना जांच ही कर रहे उपचार
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चिकित्सक लाचार, बिना जांच ही कर रहे उपचार

– गांव – कस्बों में नहीं है पशु ​चिकित्सालयों में जांच की सुविधाएं, लक्षण के आधार पर ही देते हैं दवा बस्सी (जयपुर). लोगों में होने वाली छोटी से छोटी बीमारी की जांच कर चिकित्सक दवा दे रहे हैं और मानव जांचों का करोड़ों का कारोबार भी हो रहा है। वहीं यदि पशुओं की बात […]
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– गांव – कस्बों में नहीं है पशु ​चिकित्सालयों में जांच की सुविधाएं, लक्षण के आधार पर ही देते हैं दवा

बस्सी (जयपुर). लोगों में होने वाली छोटी से छोटी बीमारी की जांच कर चिकित्सक दवा दे रहे हैं और मानव जांचों का करोड़ों का कारोबार भी हो रहा है। वहीं यदि पशुओं की बात करें तो बीमार होने वाले पशुओं को वेटरनरी चिकित्सक बिना जांच ही बीमारी के लक्षण के आधार पर दवाइयां दे रहे हैं। इसका परिणाम है कि हर साल करीब 20 फीसदी मवेशियों की बीमारी से अकाल मौत हो जाती है। पूरे जयपुर जिले में पशुओं की बीमारी की जांच केवल जयपुर में ही होती है। ग्रामीण इलाकों में जहां पशु हैं वहां जांच की सुविधा नहीं है। 2019 में हुई 20वीं पशुगणना के अनुसार प्रदेशभर में 5 करोड़ 68 लाख पशुधन हैं, जिसमें जयपुर जिले में 19 लाख गाय-भैंस व 16 लाख भेड़, बकरी अन्य पशु हैं। कहने को तो हर जिले में बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालय खोल रखे हैं, जिनमें बीमारियों की जांच का दावा किया जाता है, लेकिन आधी भी जांच नहीं हो रही है।

घोषणा हर ब्लॉक में प्रयोगशाला की कर दी, खुली नहीं…

सरकार ने प्रदेश के हर ब्लॉक स्तर पर बहु उद्देशीय पशु चिकित्सालय खोलने की घोषणा पिछले बजट में की थी, लेकिन अभी तक कहीं पर भी प्रयोगशालाएं नहीं खुली हैं। ऐसे में ब्लॉक मुख्यालय एवं पशु चिकित्सालयों में चिकित्सक बीमार पशुओं की बिना जांच ही दवा दे रहे हैं।

जयपुर जिले में हैं 34 लाख पशुधन

जयपुर जिले में यदि पशुओं की बात की जाए तो पशुपालन विभाग के आंकड़ों में करीब 19 लाख तो गाय व भैंस ही हैं। इनके अलावा करीब 15 लाख भेड़-बकरियां हैं। वहीं हजारों की संख्या में अन्य पशु भी हैं।

जयपुर जिले में हैं 27 ब्लॉक वेटरनरी हेल्थ ऑफिस

जयपुर जिले में 27 ब्लॉक वेटरनरी हेल्थ ऑफिस खोल रखे हैं, लेकिन इनमें पशुओं को लक्षण के आधार पर ही दवा की जा रही है। बाकि इनमें प्रशासनिक कार्य ही होता है। सरकार ने बजट में इन ब्लॉकों में प्रयोगशालाएं खोलने की घोषणा की थी, लेकिन अभी अमलीजामा नहीं पहनाया गया है।

इनका कहना है…

कई बार बीमारी पकड़ में नहीं आती है, तो कई बार पशुपालक झोलाछाप चिकित्सक से इलाज करवा लेते हैं। लास्ट स्टेज पर जब बीमारी की जांच करें तो पशुओं को गांवों से जयपुर तक ले जाने में दिक्कत आती है। इससे करीब 20 फीसदी बीमार पशु बिना जांच के दम तोड़ देते हैं।

— डॉ. रामकंवर मीना, उप निदेशक, निदेशालय पशुपालन विभाग जयपुर।

प्रदेश में हर ब्लाॅक पर पशुचिकित्सालयों में प्रयोगशालाएं खुलेंगी। कई जगह पर पॉली क्लिनिक भी खोले जा रहे हैं, जिनमें जिला स्तर की जांच की सुविधाएं होंगी। जयपुर जिले में पांच बत्ती पर प्रयोगशाला में पशुओं की सभी बीमारियों की जांच होती है।

— डॉ. हनुमान सहाय मीना, संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग जयपुर