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होलिका दहन से जुड़ा हुआ है इस जगह का इतिहास, जानने के लिए पढे़ यह खबर

होली ऊपर में जलती है 25 फीट ऊंची होली, कई दिन पहले होती है तैयारी अलवर. होली का अवसर आते ही शहरवासियों की जूंबा पर एक नाम सबसे पहले आता है वो है होली ऊपर। हर किसी के दिमाग में यह सवाल आता है कि इसका यह नाम क्यों पड़ा है। होली से इसका क्या संबंध रहा है। इसका जवाब है इस मौहल्लें में शहर की सबसे बड़ी और ऊंची होली बनती है। इसको बनाने के लिए यहां के लोग कई दिन पहले ही तैयारियों में जुट जाते हैं।

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Jyoti Sharma

Mar 23, 2024

यहां पर होलिका दहन के दौरान होली ऊपर चौक पर करीब 25 फीट ऊंची होली बनाई जाती है। यहां पर राजकाल से ही सबसे बड़ी होली बनाई जाती है। इस क्षेत्र में करीब एक दर्जन मौहल्ले हैं जो यहां होलिका दहन के दौरान आते हैं। इतनी बडी होलिका को देखने के लिए दूर दूर से लोग यहां आते हैं। होलिका दहन के दौरान इसकी लपटें इतनी ऊंची होती है कि आसपास के घरों के लोग घरों में बंद हो जाते हैं।

स्थानीय निवासी 85 वर्षीय प्यारेलाल शर्मा बताते हैं कि महाराजा जयसिंह के समय से ही यहां पर सबसे बड़ी और ऊंची होली बनाई जाती है। होलिका दहन के दौरान हजार से ज्यादा लोग यहां जमा होते थे। वह बताते हैं कि सबसे पहले राजमहल में होलिका दहन होता था। बाद में वहां से सूचना आती थी कि होलिका दहन हो गया तो सबसे पहले होली होली ऊपर में ही जलाई जाती थी। इसके बाद शहर के अन्य मौहल्लों में होलिका दहन होता था। वह बताते हैँ कि महाराजा जयसिंह विजय मंदिर पैलेस में रहते थे लेकिन होली का जुलूस राज महल से ही निकलता था और महाराज यहां से होते हुए ही बाजार के रास्ते शहर में जाते थे।